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Incest खाला और अम्मी की चुदा‌ई (Completed)

shakirali

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मेरे दिल में फुलझडियाँ छूटनें लगीं। मैंने अपना एक हाथ आगे कर के अम्मी का एक मोटा मम्मा पकड़ लिया। उन्होंने सर मोड़ कर मेरी तरफ देखा और कहा कि – “अभी मेरी जहनी हालत बहुत खराब है। क्या तुम कल तक सब्र नहीं कर सकते।“ मैंने कहा कि कल छोटे भा‌ई बहन यहाँ होंगे। अम्मी ने जवाब दिया कि वे उन्हें दोबारा नाना के घर भेज देंगी वैसे भी वो वहाँ जाने की हमेशा ज़िद करते हैं। उन्होंने कहा कि वो मुनासिब माहौल बना कर फुर्सत से ये करना चाहती हैं क्योंकि वो इस तजुर्बे को यादगार बनाना चाहती थीं।

मैंने कहा – “ठीक है। मगर अम्मी, ये तो बतायें के आख़िर आप राशिद से चुदवाने पर क्यों राज़ी हु‌ईं? क्या अब्बू आपकी जिस्मानी ज़रूरतें पूरी नहीं करते?”

अम्मी मेरे सवालात सुन कर थोड़ी परेशान हो गयीं। फिर कहने लगीं – “शाकिर, ये बातें को‌ई औरत अपने बेटे से नहीं करती मगर मैं तुम्हें बता ही देती हूँ कि मर्दों की तरह औरतों की भी जिस्मानी ज़रूरत होती है। पिछले क‌ई सालों से तुम्हारे अब्बू ने मुझ में दिलचस्पी लेना बहुत कम कर दिया है। इसलिये मैंने राशिद के साथ ये काम कर लिया जो मुझे नहीं करना चाहिये था। पहल उस की तरफ से हु‌ई थी और मुझे उसी वक़्त उसे रोक देना चाहिये था।“

वो वाज़ेह तौर पर शर्मिंदा नज़र आ रही थीं और इस गुफ्तगू से दामन बचाना चाहती थीं। मैंने भी उन्हें मज़ीद परेशान करना मुनासिब नहीं समझा और चुप हो गया। अम्मी कुछ देर बाद उठ कर बेडरूम से बाहर चली गयीं। मैं बेसब्री से अगले दिन का इंतज़ार करने लगा।

मैं अम्मी के कहने पर उस वक़्त तो खामोश हो गया लेकिन अगले दिन तक सब्र करना मुझे बड़ा मुश्किल लग रहा था। मैं वक़्त ज़ाया किये बगैर फौरी तौर पर अम्मी की चूत हासिल करना चाहता था। हर गुज़रते लम्हे के साथ मेरी ये खाहिश बढ़ती ही जा रही थी। शाम को मेरे भा‌ई-बहन घर वापस आ गये। मौका मिला तो मैंने अलहदगी में अम्मी से कहा कि हो सके तो वो रात को मेरे कमरे में आ जायें तो मैं आज ही उन्हें चोद लुँगा। मेरे कमरे मे किसी के भी आने का डर नहीं था क्योंकि अब्बू भी कुछ दिनों के लिये कराची गये हु‌ए थे।

मेरे दोनों छोटे बहन-भा‌ई एक कमरे में अलग सोते थे जबकि उनके बिल्कुल साथ वाला कमरा मेरा था। अम्मी और अब्बू अपने अलहदा बेडरूम में सोया करते थे। रात के पिछले पहर भा‌ई-बहन के सो जाने के बाद अम्मी खामोशी से मेरे कमरे में आ सकती थीं और मैं उन्हें आराम से चोद सकता था। किसी को कानोकान खबर ना होती। मेरी बात सुन कर अम्मी कुछ सोचने लगीं और फिर बोलीं कि – “ठीक है मैं रात बारह बजे के बाद थोड़ा मूड बना कर तुम्हारे कमरे में आ‌ऊँगी।“ दोनों बहन भा‌ई भी को‌ई दस बजे के करीब सो गये और मैं अपने कमरे में चला आया।
 

shakirali

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नींद मेरी आँखों से कोसों दूर थी। आज की रात मेरी ज़िंदगी की बड़ी ख़ास रात थी। मुझे आज रात अपनी अम्मी को चोदना था जो अगरचे मेरी सग़ी अम्मी थीं मगर एक बड़ी खूबसूरत और पुरकशिश औरत भी थीं। दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग होंगे जिन्होंने ज़िंदगी में सब से पहले जिस औरत को चोदा वो उनकी अपनी अम्मी थी। अपनी अम्मी की चूत लेने का ख़याल मेरे जज़्बात को बड़ी बुरी तरह भड़का रहा था। मैं मुसलसल सोच रहा था कि जब मेरा लंड अम्मी की चूत के अंदर जायेगा और मैं उनकी चूत में घस्से मारूँगा तो कैसा महसूस होगा। मुझे अपने जिस्म में खून की गर्दिश तेज़ होती महसूस हो रही थी।

पता नहीं कितनी ही ब्लू फिल्मों के मंज़र बड़ी तेज़ी से मेरे ज़हन में घूम रहे थे। यही सब कुछ सोचते हु‌ए मेरा लंड अकड़ चुका था और मुझे अब ये खौफ लाहक़ हो गया था के कहीं अम्मी के आने और उनकी चूत लेने से पहले ही मैं खल्लास ना हो जा‌ऊँ। फिर तो सारा मज़ा किरकिरा हो जायेगा। मैं बड़ी बेसब्री से बारह बजने का इंतज़ार करने लगा। मुझे अम्मी की मूड बना कर आने की बात भी समझ नहीं आ रही थी। फिर मालूम नहीं कब मेरी आँख लग गयी।

को‌ई साढ़े-बारह बजे अम्मी कमरे में दाखिल हु‌ईं। दरवाज़े की चटखनी बंद करने और उनकी सैंडल की ऊँची हील की आवाज़ से में जाग गया। कमरे में ला‌ईट ऑफ थी लेकिन रोशनदान में से काफ़ी रोशनी आ रही थी और मैं अम्मी को बिल्कुल साफ़ तौर से देख सकता था। वो बेहद सज-संवर के फिरोज़ी रंग का जोड़ा पहन कर आयी थीं और उन्होंने दुपट्टा नहीं ओढ़ा हु‌आ था। उनके भरे हु‌ए मम्मे अपनी पूरी उठान के साथ तने हु‌ए नज़र आ रहे थे। वो सीधी आ कर मेरे बेड पर बैठ गयीं। उनके चेहरे पर अलग क़िस्म का तासुर था। ऐसा लगता था जैसे वो मेरी अम्मी ना हों बल्कि को‌ई और औरत हों। पता नहीं ये उनका कौन सा अंदाज़ था। शायद चूत मरवाने से पहले वो हमेशा ऐसी ही हो जाती थीं या शायद मुझे चूत देने की ख़याल से उनके अंदाज़ बदले हु‌ए थे। मैं कुछ कह नहीं सकता था। हम दोनों ही थोड़ी देर खामोश रहे। मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा था कि उन से क्या बात करूँ।

बिल-आख़िर मैंने हिम्मत कर के अम्मी का एक बाज़ू पकड़ कर उन्हें अपनी तरफ खींचा। उन्होंने मुझे रोका नहीं और खुद मेरे ऊपर झुक गयीं और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये। तब मुझे एहसास हु‌आ कि उन्होंने शराब पी हु‌ई थी। अब मैं समझा कि वो शराब पी कर मूड बना रही थीं। मैंने भी एक हाथ उनके गले में डाला और उनके होठों को चूमते हु‌ए दूसरे हाथ से उनके मम्मों को मसलने लगा। अम्मी के मम्मे बड़े-बड़े और वज़नी थे और ब्रा के अंदर होने के बावजूद मुझे उन्हें मसलते हु‌ए ऐसा लग रहा था जैसे मैंने उनके नंगे मम्मों को हाथों में पकड़ रखा हो। उनकी ब्रा शायद बहुत महीन कपड़े से बनी थी। मैंने उनके मम्मों को ज़रा ज़ोर से दबाया तो उनके मुँह से हल्की सी सिसकी निकल गयी। उन्होंने अपने मम्मों पर से मेरे हाथ हटाया और मेरे कान के पास मुँह ला कर पूछा कि क्या मैंने पहले कभी सैक्स किया है?

यही सवाल मुझ से नज़ीर ने भी किया था जब वो पिंडी में अम्बरीन खाला की चूत मार रहा था। मुझे अपनी ना-तजुर्बेकारी पर बड़ी शर्मिंदगी महसूस हु‌ई मगर मैंने बहरहाल ‘नहीं’ में सर हिला दिया। अम्मी ने कहा कि मैं उनके मम्मे आहिस्ता दबा‌ऊँ क्योंकि ज़ोर से दबाने पर तकलीफ़ होती है। ये सुन कर मैंने दोबारा अम्मी के तने हु‌ए भरपूर मम्मों की तरफ हाथ बढ़ाया लेकिन उन्होंने फिर मुझे रोक दिया और उठ कर ला‌ईट ऑन कर दी।
 

shakirali

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फिर वहीं दूर खड़े-खड़े ही मुस्कुराते हु‌ए बड़ी अदा से अपनी क़मीज़ उतारने लगीं। क़मीज़ उनके मम्मों के ऊपर से होती हु‌ई सर पर आयी जिसे उतार कर उन्होंने उसे बेड पर एक तरफ रख दिया। उनका गोरा जिस्म रोशनी में निहायत खूबसूरत लग रहा था। बड़े-बड़े उभरे हु‌ए मम्मे लाल रंग की ब्रा में से काफ़ी हद तक नंगे नज़र आ रहे थे और यों लग रहा था जैसे दो लाल तोपों ने अपने दहाने मेरी तरफ कर रखे हों। अम्मी के मम्मे बड़े और भारी होने के साथ-साथ काफ़ी चौड़े भी थे और ऐसा लगता था जैसे उनके दोनों मम्मों के दरमियाँ बिल्कुल को‌ई फासला नहीं था। अम्मी का बेदाग और फ्लैट पेट और बिल्कुल गोल नाफ भी नज़र आ रहे थे। मैंने सोचा के क्या अब्बू का दिमाग खराब है जो अम्मी जैसी खूबसूरत और हसीन सैक्सी औरत को चोदना नहीं चाहते? ऐसा कौन सा मर्द होगा जो अम्मी की चूत नहीं लेना चाहेगा।

अम्मी किसी मॉडल की तरह ऊँची हील की सैंडल में अदा से कैटवॉक करके चलती हु‌ई मेरे पास आ गयीं। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। उन्होंने भी देख लिया था कि मैं उनके जिस्म को ललचा‌ई हु‌ई नज़रों से देख रहा था। वो ब्रा, सलवार और सैंडल उतारे बगैर ही बेड पर चढ़ कर मेरे साथ लेट गयीं। मैं हज़ारों दफ़ा अपनी अम्मी के साथ लेटा था मगर आज की रात मामला ज़रा मुख्तलीफ़ था।

मैंने भी फौरन अपने कपड़े उतार दिये और बिल्कुल नंगा हो कर अम्मी की तरफ करवट ली और उन से लिपट गया। जैसे ही मेरा नंगा जिस्म उन के आधे नंगे जिस्म से टकराया मुझे लगा जैसे मेरे लंड में आग सी लग गयी हो। अम्मी का जिस्म नर्म-ओ-मुलायम और हल्का सा गरम था। मेरा लंड फौरन ही खड़ा होने लगा। अम्मी ने अपनी रानों के पास मेरे लंड का दबाव महसूस किया और मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में किसी क़िस्म की तशवीश या शर्मिंदगी नहीं थी।

उसी वक़्त मेरे ज़हन में एक बहुत ही परेशान-कुन ख़याल आया। मैंने ब्लू-फिल्मों में चुदा‌ई का काफ़ी मुशाहिदा किया था और या फिर नज़ीर को अम्बरीन खाला की फुद्दी लेते हु‌ए देखा था। लेकिन आज तक मुझे किसी औरत को चोदने का इत्तेफ़ाक नहीं हु‌आ था। मेरे दिल में अचानक ये खौफ पैदा हु‌आ कि कहीं ऐसा ना हो मैं अम्मी को अपनी ना-तजुर्बेकारी की वजह से ठीक तरह चोद ना सकूँ। फिर क्या होगा? मैं इस एहसास-ए-कमतरी का भी शिकार था कि राशिद चुदा‌ई में मुझ से ज्यादा तजुर्बेकार और बेहतर था। मैंने खुद अपनी आँखों से उसे अम्मी को चोद कर उनकी फुद्दी में अपनी मनि छोड़ते हु‌ए देखा था। उसने यक़ीनन और भी क‌ई दफ़ा अम्मी की फुद्दी मारी थी और मुझे ये भी एहसास था कि वो अम्मी को तसल्लीबख्श तरीके चोदता होगा क्योंकि अगर ऐसा ना होता तो अम्मी बार-बार उसे अपनी फुद्दी मारने देतीं? आज अगर में अम्मी को राशिद जैसा मज़ा ना दे सका तो क्या होगा? अम्मी ने मुझे बताया था के अब्बू उन्हें अब कभी-कभार ही चोदते थे। उन्हें मुझ से भी मज़ा ना मिला तो वो अपना वादा तोड़ कर दोबारा राशिद से चुदवाना शुरू कर सकती थीं। ये बात मुझे हरगिज़ क़बूल नहीं थी। मुझे हर सूरत में एक काबिल मर्द की तरह अम्मी की चूत की ज़रूरियात पूरी करनी थीं।
 

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अम्मी मेरे चेहरे से भाँप गयीं के मुझे को‌ई परेशानी लहक़ है। उन्होंने पूछा – “क्या बात है, शाकिर? क्या सोच रहे हो?” मैं कुछ सटपटा सा मगर फिर उन्हें बता ही दिया कि – “अम्मी, आज मैं पहली दफ़ा सैक्स कर रहा हूँ और मैं डर रहा हूँ कि कहीं आपको मुझे अपनी चूत देकर मायूसी ना हो। मैं जल्दी खल्लास होने से डरता हूँ और इसी वजह से कुछ परेशान हूँ।“

अम्मी हंस पड़ीं और मेरा हौसला बढ़ाते हु‌ए कहा – “पहली दफ़ा सब के साथ ऐसा ही होता है। तुम फिक्र ना करो। चुदा‌ई इंसान की फ़ितरत है और रफ़्ता-रफ़्ता खुद-ब-खुद ही सब कुछ समझ आ जाता है।“ मैं उनकी बात गौर से सुन रहा था। फिर उन्होंने कहा कि – “तुम तो कम-उम्र लड़के हो... तुम से चुदवा कर तो हर औरत खुश होगी। कुछ ही दिनों में तुम इस काम में माहिर हो जा‌ओगे! और फिर मैं तो तजुर्बेकार हूँ... कितनों को... मेरा मतलब राशिद को भी सिखाया है तो वैसे ही तुम्हारी मदद भी करुँगी।”

मैं पूर-सकून हो गया। मैंने अपने ज़हन में सर उठाते हु‌ए खौफ से तवज्जो हटाने की कोशिश की और अम्मी के गालों को ज़ोर-ज़ोर से चूमने लगा। उन्होंने भी मेरा पूरा साथ दिया और अपने बाज़ू मेरी कमर के गिर्द लपेट कर मुझे अपने ऊपर आने दिया। मैंने अपने दोनों बाज़ू उनकी गर्दन में डाले और उन से पूरी तरह चिपक कर उन्हें चूमने लगा। मैंने अम्मी के होठों, गालों, ठोड़ी और गर्दन को चूम-चूम कर उनका पूरा चेहरा गीला कर दिया। वो भी इस चूमाचाटी का मज़ा ले रही थीं। फिर उन्होंने मेरे मुँह के अंदर अपनी ज़ुबान डाली तो मैंने उनकी जीभ अपने होठों में पकड़ी और उसे चूसने लगा। मेरे मुँह के अंदर मेरी और उनकी ज़बानें आपस में टकरातीं तो अजीब तरह का मज़ा महसूस होता। तजुर्बा ना होने की वजह से उनकी जीभ कभी मेरे होठों से निकल जाती तो वो फौरन उसे दोबारा मेरे होठों में दे देतीं। मुझे अम्मी की जीभ चूसने में गज़ब का लुत्फ़ आ रहा था। मेरा लंड अम्मी के नरम पेट से नीचे उनकी सलवार में घुसा हु‌आ था।

अम्मी के चेहरे के तासुरात से लग रहा था कि कम-अज़-कम अब तक तो मैं ठीक ही जा रहा था। मैं अम्मी से बुरी तरह चिपटा हु‌आ उन्हें चूम रहा था और वो भी मेरी ताबड़तोड़ चुम्मियों का जवाब दे रहीं थीं। हमारी साँस चढ़ गयी थी। अम्मी अब वाज़ेह तौर पर बेहद गरम होने लगी थीं। उनका जिस्म जैसे हल्के बुखार की कैफियत में था। अपनी अम्मी को चोदने का ख्याल मुझे पागल किये दे रहा था। मेरे ज़हन से अब जल्दी खल्लास होने का डर भी निकल चुका था। मैंने सोचा के ब्लू-फिल्मों से सीखी हु‌ई चीजें कामयाबी से कर के अम्मी को इंप्रेस करने का यही वक़्त है।
 

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मैं अम्मी के ऊपर से उठ गया और उन्हें करवट दिला कर सा‌इड पर कर दिया। फिर मैंने कमर पर से उनकी ब्रा खोल कर उसे उनके जिस्म से जुदा कर दिया। इस पर अम्मी ने खुद ही अपनी सलवार और पैंटी उतार कर टाँगों से अलग कर दी। अब वो सिर्फ ऊँची हील वाली सैंडल पहने हु‌ए मुकम्मल नंगी हालत में थीं। मैंने उन्हें सीधा करने के लिये आगे हाथ ले जा कर उनके मोटे-मोटे नंगे मम्मों को हाथों में दबोच लिया और उन्हें अपनी जानिब खींचा। उन्होंने अपने खूबसूरत और दिलनशीं जिस्म को संभालते हु‌ए मेरी तरफ करवट ले ली। मैंने उनके दूधिया मम्मों को पागलों की तरह चूसना शुरू कर दिया। मेरी नज़र में मम्मे औरत के जिस्म का सब से शानदार हिस्सा होते हैं और मेरी अम्मी के मम्मों की तो बात ही कुछ और थी। मैंने अम्मी के दोनों मम्मों को बारी-बारी इस बुरी तरह चूसा और चाटा के उनका रंग लाल हो गया। अम्मी के निपल्स को मैंने इतना चूसा कि वो अकड़ कर बिल्कुल सीधे खड़े हो गये थे।

मैं उनकी ये बात बिल्कुल भूल चुका था कि मम्मों के साथ नर्मी और एहतियात से पेश आना चाहिये। क‌ई दफ़ा जब मैंने उनके मम्मे ज़ोर से चूसे या दबाये तो वो बे-साख्ता कराह उठीं लेकिन उन्होंने मुझे रोका नहीं। अपने मम्मे चुसवाने के दौरान अम्मी काफ़ी मचल रही थीं और मुसलसल अपना सर इधर-उधर घुमा रही थीं। जब मैं उनके मम्मों के निप्पल मुँह में ले कर उन पर ज़ुबान फेरता तो वो बे-क़ाबू होने लगतीं और मुझे उनके जिस्मानी रद्द-ए-अमल से महसूस होता जैसे वो अपने पूरे मम्मे मेरे मुँह में घुसा देना चाहती हैं। उनके निप्पल भी बे-इंतेहा लज्ज़तदार थे। मुझे उन्हें चूसने में ज़बरदस्त मज़ा आ रहा था। मेरे लंड की भी बुरी हालत हो रही थी जिसे शायद अम्मी ने महसूस कर लिया था और वो अपना हाथ मेरे अकड़े हु‌ए लंड पर रख कर बड़ी नरमी से ऊपर-नीचे फेरने लगीं। जब उन्होंने मेरा लंड अपने हाथ में लिया तो मुझे अपने टट्टों में अजीब किस्म का खिंचाव महसूस होने लगा।

कुछ देर तक अम्मी के दोनों मम्मों को चूसने के बाद मैं सरक कर अम्मी की टाँगों की तरफ आया तो उन्होंने अपनी टाँगें फैला दीं। मैं उनकी फैली टाँगों के बीच में आ गया। अब मैं उनकी दिलकश चूत का नज़ारा देख रहा था। अम्मी की चूत भी अम्बरीन खाला की चूत की तरह बगैर-बालों के बिल्कुल साफ और चिकनी थी। फूली होने के बावजूद उनकी चूत सख्ती से बंद नज़र आ रही थी। मैंने उनकी चूत पर हाथ फेरा तो उन्होंने शायद गैर-इरादी तौर पर उन्होंने अपनी टाँगें बंद करने की कोशिश की मगर मैं अपने सर को नीचे कर के उनकी टाँगों के बीच में ले आया और मैंने अपना मुँह उनकी चूत पर रख दिया। यहाँ भी ब्लू-फिल्में ही मेरे काम आ‌ईं। मैंने अम्मी की चूत पर ज़ुबान फेरी और उसे ज़ोरदार तरीक़े से चाटने लगा। मेरे लि‌ए चूत चाटने का यह पहला मौका था मगर जल्द ही मैं जान गया के अम्मी को खुश करने के लिये मुझे क्या करना है। अम्मी की टाँगें अकड़ गयी थीं और उनका एक हाथ मुसलसल मुझे अपने सर को सहलाता हु‌आ महसूस हो रहा था। उनके मुँह से वाक़फे-वाक़फे से सिसकने की आवाज़ आ रही थी। मैंने अपनी ज़ुबान उनकी चूत पर फेरते-फेरते उनके चूतड़ों पर हाथ फेरा तो मुझे अचानक उनकी गाँड का सुराख मिल गया। मैंने फौरन सर झुका कर उसे भी चाट लिया। गाँड चाटने से मुझे भी बहुत मज़ा आया और अम्मी को भी मज़ा आने लगा और थोड़ी ही देर में उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया। उसका नमकीन ज़ायक़ा अपनी ज़ुबान पर महसूस कर के मुझे फख्र हु‌आ कि मैं अम्मी को फारिग करने में कामयाब हो गया था।
 

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उनके फारिग होने के बाद कुछ देर हम दोनों नंगे एक-दूसरे की बांहों में लेटे रहे। मुझे इस बात की खुशी थी कि मेरी कारगुजारी से अम्मी झड़ चुकी थीं मगर मेरा लंड अभी चूत की गिरफ्त से नावाकिफ था। उसकी बेचैनी को महसूस कर के अम्मी ने अपना हाथ मेरे लंड पर रखा और उसे बड़ी नर्मी से मुट्ठी में लिया और अपना हाथ ऊपर नीचे करने लगीं। मैं बहुत बार मुट्ठी मार चुका था पर अम्मी के हाथ का मज़ा ही अलग था। फिर अम्मी घुटनों के ज़ोर पर बेड पर बैठ गयीं और मेरे ऊपर झुक कर मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया। मैंने ब्लू-फिल्मों में भी यही होते देखा था और अम्बरीन खाला ने भी नज़ीर के साथ यही किया था। मेरे लंड का टोपा अम्मी के मुँह के अंदर चला गया और वो उस पर अपनी ज़ुबान फेरने लगीं। मैंने अम्मी को राशिद का लंड भी चूसते हु‌ए देखा था। उस वक़्त तो उन्होंने काफी जल्दी में राशिद के लंड को चूसा था मगर मेरे लंड को वो बड़ी महारत और आराम से चूस रही थीं।

उन्होंने पहले तो मेरे लंड के गोल-टोपे पर अच्छी तरह अपनी ज़ुबान फेर कर उसे गीला कर दिया और फिर लंड के निचले हिस्से को चाटने लगीं। फिर इसी तरह मेरे लंड पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर उनकी ज़ुबान गर्दिश करती रही। लंड चूसते-चूसते अम्मी की ज़ुबान बहुत गीली हो चुकी थी और जब वो मेरे लंड को अपने मुँह के अंदर करतीं तो ऐसे लगता जैसे मेरा लंड पानी के गिलास के अंदर चला गया हो। कुछ ही देर में मेरा लंड टोपे से ले कर टट्टों तक अम्मी के थूक से भर गया। उनके मुँह में भी बार-बार थूक भर जाता था लेकिन वो एक लम्हे के लिये रुक कर उसे निगल लेतीं और फिर मेरा लंड चूसने लगतीं।

यकायक अम्मी ने बड़ी तेज़ी से मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया। उनका चेहरा लाल हो चुका था। मेरे टोपे को उन्होंने होंठों में ले कर ज़ोर-ज़ोर से चूसा तो मेरे लंड में तेज़ सनसनहट होने लगी और मेरे टट्टे सख्त होने लगे। मुझे लगा जैसे मैं खल्लास हो जा‌ऊँगा। मैंने अम्मी को रोकना चाहा मगर उन्होंने नहीं सुना। फिर मैंने देखा कि उन्होंने अपना एक हाथ अपनी चूत पर रखा हु‌आ था और बड़ी उंगली अपनी चूत के अंदर डाल कर उसे तेज़ी से अंदर-बाहर कर रही थीं।

मैं समझ गया कि उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा और वो खल्लास होने के करीब हैं। अम्मी को अपनी चूत में उंगली करते देख कर मैं भी सब्र ना कर सका उनके मुँह में ही मेरे लंड से झटकों के साथ मनि निकलने लगी। अपने मुँह के अंदर मेरी मनि को महसूस करके अम्मी ने मेरा लंड पर अपने होंठ और ज़ोर से जकड़ दिये और मेरे टट्टों को मुठ्ठी में पकड़ कर दबाने लगीं। अम्मी जल्दी-जल्दी मेरी मनि निगल रही थीं लेकिन मेरे लंड से इतनी तादाद में मनि निकल रही थी कि उन्हें मुँह खोलना ही पड़ा जिससे मेरी मनि उनके होंठों और गालों पर भी गिरने लगी। अम्मी खुद भी तेज़-तेज़ साँसें लेती हु‌ई खल्लास होने लगीं। उनका मुँह खुल गया और आँखें बंद हो गयीं। मैंने जल्दी से हवा में झूलता हु‌आ उनका एक मम्मा मुठी में जक्ड़ लिया और अपना लंड फिर उनके मुँह में देने की कोशिश की मगर उन्होंने ज़ुबान से ही मेरे टोपे पर लगी हु‌ई मनि चाट ली।
 

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फारिग होने के बाद हमारे औसान बहाल हु‌ए तो मैंने कहा – “अम्मी, आप तो कमाल का लंड चूसती हो। मुझे ऐसा मज़ा कभी नहीं आया। मगर मैं आपकी चूत तो चोद ही नहीं सका और आपके मुँह में ही निपट गया।”

उन्होंने हंस कर जवाब दिया – “अगर तुम मेरे मुँह में फरिग नहीं होते तो मुझे तुम्हारी मनी का लज़ीज़ ज़ायका कैसे मिलता। और फिर अभी तो एक ही बजा है। तुम थोडा आराम कर के अपनी ताक़त फिर से हासिल कर लो। फिर तुम अपनी बाकी मुराद भी पूरी कर लेना।“ मैंने सोचा के अब मुझे नींद तो आने से रही। लेकिन ऐसा नहीं हु‌आ। अम्मी मेरे सर पर हाथ फेरने लगीं तो मुझे पता ही नहीं चला कि मैं कब नींद की आगोश में चला गया। अम्मी शायद अपने तजुर्बे से जानती थीं कि झड़ने के बाद अमूमन मर्दों को नींद आ जाती है।

को‌ई एक घंटे के बाद मेरी नींद तब खुली जब मैंने अपने लंड पर एक निहायत पुरलुत्फ जकड़न महसूस की। मैंने आँखें खोली तो पाया कि मेरा तना हु‌आ लंड अम्मी की मुट्ठी में था। कमरे की ला‌इट अभी भी ऑन ही थी और अम्मी भी पहले जैसे बिल्कुल नंगी थीं और उन्होंने ऊँची ही वाले सैंडल भी नहीं उतारे थे। अम्मी ने मुस्कराते हु‌ए कहा – “शायद तुम को‌ई खुशनुमा ख्वाब देख रहे थे। तभी ये नींद में ही खड़ा हो गया।“ मैं अम्मी को लिटा कर उनके ऊपर चढ़ गया और उनके जिस्म को चूमने चाटने लगा। मेरा लंड बेचैन हो चुका था। मैं उस वक़्त दुनिया जहान से बेखबर था और सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी अम्मी के पुरकशिश और गदराये हु‌ए जिस्म से पूरी तरह लुत्फ़-अंदोज़ होना चाहता था। शायद क़यमत भी आ जाती तो मुझे पता ना चलता। मैं उनके ऊपर लेट कर उनका एक मम्मा पकडे हु‌ए उनकी गर्दन के बोसे ले रहा था कि अचानक अम्मी ने अपनी टाँगें पूरी तरह खोल दीं। मेरा तना हु‌आ लंड उनकी चूत के ऊपर टकरा गया। मैंने महसूस किया कि अम्मी ने आहिस्ता से अपने जिस्म को ऊपर की तरफ़ उठया और अपनी चूत से मेरे लंड पर दबाव डाला। मैं बे-खुद सा हो गया और अपना एक हाथ नीचे ले जा कर उनकी चूत को बड़ी तेज़ी और बे-दर्दी से मसलने लगा। अम्मी की चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। वो अब बहुत ज्यादा गरम हो रही थीं और सिसकियाँ ले रही थीं। अब अपनी अम्मी की चूत में लंड घुसाने का वक़्त आ पुहँचा था।

मैंने अपना लंड अम्मी की चूत के अंदर घुसाने की कोशिश की मगर मुझे कामयाबी नहीं मिली। अम्मी मेरी नातजुर्बेकारी को समझ गयीं। अभी मैं अम्मी की चूत में अपना टोपा घुसाने की कोशिश कर ही रहा था कि मेरी मदद करने की खातिर उन्होंने अपना हाथ नीचे किया और मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर दबाया और फिर उनकी कमर उठी और मेरा लंड अम्मी की चूत को फैलाता हु‌आ उसके अंदर समाने लगा। उनकी चूत अंदर से नरम और गीली थी। अगरचे मेरा लंड बड़ी आसानी से अम्मी की चूत के अंदर गुसा था मगर इसमें को‌ई शक नहीं था कि उनकी चूत काफी टा‌इट थी।
 

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जैसे ही मेरा लंड अम्मी की चूत के अंदर गया मुझे उनकी चूत आहिस्ता-आहिस्ता खुलती हु‌ई महसूस हु‌ई और मेरा लंड टट्टों तक उसके अंदर गायब हो गया। उन्होंने हल्की सी सिसकी ली और अपने दोनों हाथ मेरे बाजु‌ओं पर रख कर अपने चूतड़ों को थोड़ा ऊपर-नीचे किया ताकि मेरा लंड अच्छी तरह उनकी चूत में अपनी जगह बना ले। मैं पहली बार अपने लंड पर चूत की कसावट महसूस कर रहा था और यह एहसास नाकाबिले-बयां था। लंड अंदर जाते ही मैंने बे-साख्ता घस्से मारने के लिये अपने जिस्म को ऊपर-नीचे करने शुरू कर दिया। ये बिल्कुल क़ुदरती तौर पर हु‌आ था।

अचानक अम्मी सिसकते हु‌ए बोलीं – “इतने बेकरार मत हो... तुम जल्दबाज़ी करोगे तो पूरा मज़ा नहीं ले सकोगे! जैसा मैं कहती हूँ वैसा करो।“ मैंने बामुश्किल अपने धक्कों को रोका। अम्मी ने मेरे चेहरे को अपनी जानिब खींचा और मेरे होंठों से अपने होंठ मिला दिये। उनके बोसे का मज़ा लेने के साथ-साथ मैंने अपने लंड के र्गिर्द अम्मी की चूत की गिरफ्त को महसूस किया। कुछ देर बाद अम्मी अपने चूतड़ हौले-हौले उठा कर मेरा लंड अपनी चूत में लेने लगीं। उन्होंने मुझे आँखों से इशारा किया कि मैं भी धक्के मारूँ। मैंने उनकी ताल से ताल मिला कर हलके-हलके धक्के लगाने लगा। अम्मी ने एक हाथ लंबा करके चूतड़ पर रखा हु‌आ था और ज़ोर दे कर मेरा लंड अपनी चूत में लेने लगीं। कुछ घस्सों के बाद मेरा लंड आसानी से अम्मी की चूत के अंदर बाहर होने लगा तो अम्मी ने अपने धक्कों की ताक़त बढ़ा दी। अब हम दोनों एक दूसरे के घस्सों का जवाब पुरजोर घस्सों से दे रहे थे। मुझे अम्बरीन खाला याद आयी। वो भी इसी तरह अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर नज़ीर से चुदी थीं। अम्मी कुछ देर तो दबी आवाज़ में सिसकते हु‌ए चुदती रहीं लेकिन जब मेरे लंड के झटके तेज़ हो गये तो उन्होंने खुल कर ज़ोर-ज़ोर से “ऊँह... आ‌आहहह... ओहहह” करना शुरू कर दिया।

अम्मी को चोदते हु‌ए मैं मज़े के एक गहरे समंदर में गोते खा रहा था। उनके मुँह से निकलने वाली बेधड़क सिस्कारियाँ मुझे और भी पागल करने लगीं। इन आवाज़ों ने मेरे ज़हन को बड़ा सकून बख्शा और मेरे एहतमाद में इज़ाफ़ा हु‌आ कि मैं अम्मी को चुदा‌ई का मज़ा देने की सलाहियत रखता हूँ। कुछ देर के बाद अम्मी की साँसें तेज़ हो गयीं। उन्होंने नीचे लेटे-लेटे अपनी गाँड को गोल-गोल घुमाना शुरू कर दिया और मेरा सर नीचे कर के मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिये और खूब कस कर मुझे चूमने लगीं। उनकी चूत में बला की कसावट आ गयी थी।
 

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मेरे नीचे उनके चूतड़ों की हरकत और तेज़ हो गयी। मुझे ऐसा महसूस हु‌आ जैसे अम्मी की चूत ने मेरे लंड को सख्ती से अपनी गिरफ्त में जकड लिया हो। अब मैं समझ गया कि अम्मी खल्लास होने वाली थीं। मुझे ये जान कर बहुत खुशी हु‌ई और मैं उनकी चूत में ज्यादा रफ़्तार से घस्से मारने लगा। मैं इस काबिल तो हो ही गया था कि अपनी अम्मी को चोद कर खल्लास कर सकूँ। अम्मी की चूत अब लगातार पानी छोड़ रही थी और उनके जिस्म में बुरी तरह झटके लग रहे थे। इन हालात में मेरे लिये अपने आप को संभालना मुश्किल हो रहा था। मैंने बिला सोचे समझे अपना लंड अम्मी की पानी से भरी हु‌ई चूत से बाहर निकाल लिया और उनकी बगल में लेट गया।

अम्मी का जिस्म चंद लम्हे ऐसे ही लरजता रहा। फिर उन्होंने अपनी साँसें क़ाबू में करते हु‌ए मुझ से पूछा कि क्या हु‌आ। मैंने कहा – “मुझे फारिग होने का डर था। इसलिये घस्से मारने बंद कर दिये क्योंकि मैं और मज़े लेना चाहता था।“

वो एक बार फिर हंस कर बोलीं – “शाकिर, तुम एक घंटे पहले ही खल्लास हु‌ए हो। मर्द एक दफ़ा झड़ने के बाद दूसरी बार उतनी जल्दी नहीं छूटते? परेशान मत हो... रफ़्ता-रफ़्ता सब समझ जा‌ओगे बस थोड़े तजुर्बे की जरूरत है... चलो आ‌ओ और खुद को डिसचार्ज करो ताकि इस काम का मज़ा तो ले सको!”

मैंने उनसे पूछा कि उन्हें मज़ा आया क्या तो उन्होंने कहा कि अगर मज़ा नहीं आता तो वो दो दफ़ा खल्लास कैसे होतीं। फिर वो उठीं और घूम कर अपनी दोनों कुहनियों और घुटनों के सहारे बेड पर घोड़ी बन गयीं और अपने मस्त मोटे-मोटे चूतड़ों को ऊपर उठा दिया और बोलीं कि अब मैं उन्हें पीछे से चोदूँ। इस तरह अम्मी ने अपनी हसीन गाँड का रुख मेरी तरफ कर दिया और अपनी टाँगें भी फैला लीं।

मैंने उठ कर अम्मी के चूतड़ों में से झाँकते हु‌ए उनकी गाँड के छोटे से गोल सुराख पर उंगली फेरी तो मेरा लंड फिर अकड़ने लगा। अम्मी की चूत अब उनके उभरे हु‌ए चूतड़ों के अंदर उनकी गाँड के सुराख से ज़रा नीचे नज़र आ रही थी। मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुँह पर रख कर उसे अपने टोपे के ज़रिये महसूस किया। अम्मी ने अपने चूतड़ों को थोड़ा सा पीछे किया और मैंने अपना लंड पीछे से उनकी चूत में घुसेड़ दिया। अम्मी की चूत अभी भी गीली थी इसलिये मेरे लंड को उस के अंदर दाखिल होने में को‌ई मुश्किल पेश नहीं आयी। मैंने अम्मी के हसीन गदराये चूतड़ों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उनकी चूत में घस्से मारने लगा।
 

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मुझे ऊपर से अपना लंड अम्मी के गहरे चूतड़ों में से गुज़रता हु‌आ उनकी चूत में अंदर-बाहर होता नज़र आ रहा था। वो भी मेरे लंड पर अपनी चूत को आगे पीछे कर रही थीं। मेरा लंड अम्मी के गदराये हु‌ए चूतड़ों के अंदर छुपी हु‌ई उनकी चूत को चोद रहा था। मैंने उनकी कमर पर हाथ रखे और उनकी चूत में घस्से पे घस्से लगाने लगा। मुसलसल घस्सों की वजह से अम्मी के चूतड़ों में एक इर्ति‌आश की सी कैफ़ियत पैदा हो रही थी और उनके चूतड़ लरज़ रहे थे। फिर मुझे अपने लंड पर अजीब किस्म का लज़्ज़त-अमेज़ दबाव महसूस होने लगा। मैंने गैर-इरादी तौर पे अम्मी की चूत में घस्सों की रफ़्तार बढ़ा दी।

अम्मी को शायद इल्म हो गया कि मैं अब फारिग होने वाला हूँ और उन्होंने भी अपने चूतड़ों को बड़े नपे-तुले अंदाज़ में मेरे लंड पर आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। उन्होंने अपनी चूत को मेरे लंड पर भींचना शुरू कर दिया। ताबडतोड धक्कों के बीच उनकी चूत में मेरे लंड से पानी की बौछार शुरू हो गयी। मेरे रग-रग में एक मदहोश कर देने वाली अजीब-ओ-ग़रीब लज्ज़त का तूफान उठ रहा था। ठीक उसी वक़्त अम्मी की चूत ने एक दफ़ा फिर मेरे लंड को अपने शिकंजे में कसा और अम्मी भी मेरे साथ फिर खल्लास हो गयीं। मैं अम्मी को बांहों में भींच कर उनके ऊपर पसर गया। तूफ़ान के गुजरने के बाद अम्मी ने उठ कर मेरा गाल चूमा और कपड़े उठा कर बिल्कुल नंगी ही ऊँची हील की सैंडलों में गाँड मटकाती अपने कमरे में चली गयीं।

मुझे अपनी पहली चुदा‌ई में इतना मज़ा आया कि मेरा मन उन्हें फिर से चोदने के लि‌ए मचल रहा था। अब्बू के वापस लौटने में कुछ दिन बाकी थे। अगली रात मैं बेकरारी में करवटें बदलते-बदलते सो गया। सपने में मैं अपने लंड को सहला रहा था और दु‌आ कर रहा था कि खुदा मुझ पर मेहरबान हो जाये और अम्मी को मेरे पास भेज दे। मैंने अपने लंड को मुट्ठी में ले कर दबाया तभी मेरी नींद टूट गयी। ये क्या? अम्मी मेरे पास लेटी थीं और मेरा लंड उनकी मुट्ठी में था। उन्होंने मुस्कुरा कर पूछा – “तुम को‌ई ख्वाब देख रहे थे?”

मैंने शरमा कर कहा – “मैं तो ख्वाब में आपके आने का इंतज़ार कर रहा था। मुझे गुमान ही नहीं था कि आप हकीकत में आ जायेंगी।“
 
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