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जोरू का गुलाम भाग २३८ पृष्ठ १४५०
वार -१ शेयर मार्केट में मारकाट
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वार -१ शेयर मार्केट में मारकाट
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Ekdm sahi kaha, Guddi to dene ko taiyar baithi kab seFinally, guddi ke bhai ne guddi ke har chhed ka maja le hi liya
Ekdam sahi kaaha apane dinner ke interval ke baad , non-stop kabaddiS
Sej to saj chuki hai raat bhar kabaddi ke liye
Pichalai baar saali ki 5 din vaali chhutti chl rahi thi is liye is baar sood sametRin
Ab jakar jiju or sali ka intejar khatam hoga
ब्रेक के बाद तरोताजा होकर एक बार फिर से आपकी कविताओं का रस लेने को हमलोग आतुर रहेंगे..मेरे सभी पाठकों को नमस्कार...ससुर और बहू की यौन अंतरंगता पर आखिरी एपिसोड के साथ, मेरा मानना है कि अनाचार संबंधों पर मेरी सभी कामुक कविताएं पूरी हो गई हैं और अब कोई रिश्ते नहीं बचे हैं जिन्हें मुझे आपके पढ़ने के लिए अपनी पेशकश के रूप में शामिल करना चाहिए था। मैं आप सभी की आभारी हूँ जिन्होंने उन कविताओं को पढ़ा और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियों से ऐसी और कविताएँ लिखने के लिए प्रेरित किया। अब इससे ब्रेक लेने का समय आ गया है जब तक मुझे लिखने के लिए कुछ नया नहीं मिल जाता।
इसमें तो हम पाठकों का हीं फायदा है...आपकी यह रचना बाकी सारी रचनाओं से अलग थी।
पहली बार शायद आपने किसी बहु प्रचलित लम्बी कहानी का काव्य रूपांतरण प्रस्तुत किया और आप के अलावा यह किसी के बस का भी नहीं था।
कंचन और ससुर की कहानी काफी लम्बी थी, लेकिन आपने सारे पात्रों का प्रयोग किया, यहाँ तक की विमला का भी।
फिर सिडक्शन भी आपने बहुत अच्छे ढंग से पेश किया।
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जैसा मैंने आपसे पहले भी इज्जाजत ली थी, अपनी कहानी छुटकी में इस कविता को ट्रिब्यूट के तौर पर ससुर बहू संबध पर भी कुछ प्रसंग लिखूंगी और आपकी की पंक्तियाँ भी उद्धृत करुँगी।
आपकी ऊर्जा, रचनशीलता और मानवीय संबधों की ऊष्मा को शब्दों में ढालने की क्षमता ऐसी है की मुझे विश्वास है की आपकी एक और रचना भले ही अनाचार संबंधो पर न हो, देखने को मिलेगी।
आभार
ये खेल हीं ऐसा है कि जब एक दूसरे से खुल जाएं तोThanks so much aapko ye part pasand aaya ye bahoot natural tha. Kitchen men aurrten ladkiyan ek dosare se bahoot khul ke baatr karti hain kyonki vahan aadmi aksr nahi aate
लेकिन डिनर टेबल पर बैठने के बजाय पंगत में बैठ कर गारियों के साथ ..Next
Next part dinner ka hi hai. Dinner ke saath chhedkhani
ये तीन दिन तो महाविकट होंगे गुड्डी के लिए...aur ye dikahta hai nanad aur mithi bhabhi men kya jabrdst dosti huyi, lekin fir 3 raat aur 3 din to agle kayi parts Jija saali aur khas taur se Guddi aur Reenu pe
कविता की....कहानी की तार्किक परिणति
और उत्तेजना इस बार चरम सीमा पर थी।
और रीनू और आपके साजन का खेल भी फोकस में...एकदम और अबकी काफी फोकस गुड्डी और रीनू पर ही रहेगा।