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जोरू का गुलाम भाग २३८ पृष्ठ १४५०
वार -१ शेयर मार्केट में मारकाट
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Pati ke sath thoda jyada nahi ho rahaक़तल की रात
मैंने मम्मी की ओर मुस्करा के देखा और उन्होंने भी मेरा मतलब समझ के, न वो सिर्फ मुस्करायीं ,बल्कि जोर से आँख मार के उन्होंने मुझे अपने पास बुला भी लिया। बांहों में मुझे भींच के बोलीं ,
" अब इस छिनार की नथ उतारने का समय आ गया है। बहुत तड़प रही है बिचारि। "
"एकदम मम्मी लेकिन ज़रा अपने इस माल को ठीक से देख तो लीजिये। "
मैंने टुकड़ा लगाया।
…..
और मम्मी मेरी बात मान के एक बार फिर उनके पास गयीं और इस बार उनकी निगाह उनके उठे ,खूब मांसल गोरे गोरे गदराये चूतड़ों पर थी ,एकदम मक्खन जैसे चिकने ,मुलायम।
" साले अगर किसी की दुल्हन होता न तो रोज रात वो बिना नागा तेरी गांड मारता ,पक्की गारंटी है मेरी। "
और ये कहते हुए बड़े प्यार से मम्मी ने उनके चूतड़ सहलाये , और मेरी ओर देखा , मैं क्यों मौक़ा छोडती ,बोल पड़ी ,
" अरे मम्मी , गांड तो इनकी अभी भी रोज बहुत प्यार से मारी जा सकती है। "
मम्मी तब तक असली जगह का मौका मुआयना कर रही थीं।
एकदम कसा हुआ हलका सा ब्राउन छेद ,चारो और मसल्स से जकड़ा।
थोड़ी देर तक अपनी तर्जनी से मम्मी ने उसे रगड़ और उसे पुश करने की कोशिश की ,... लेकिन फेल।
उन्होंने जोर बढ़ाया पर तब भी , अंदर घुसाना बहुत मुश्किल लग रहा था।
एक बार फिर मॉम ने मेरी ओर देखा और बोलीं ,
" तू सच कह रह थी अभी तक कोरी है इसकी "
और फिर अपनी बात का रुख मम्मी ने उनकी ओर मोड़ दिया ,
" सुन बहनचोद , मां के भंडुए , घबड़ा मत ,... परेशान होने की कोई बात नहीं है , जैसे तेरे इस टनाटन लौंडे से तेरी उस छुटकी बहिनिया की चूत फड़वाउंगी न वैसे ही तेरी इस कच्ची कसी गांड का भी जल्द इलाज करुँगी।
अब मैं आ गयी हूँ न ,तेरे इस लौंड़े को जैसे तेरी बहन की कसी चूत का मजा दिलवाऊंगी , तेरी माँ के रसीले भोंसडे का मजा दिलवाऊंगी ,
वैसे तेरी इस गांड को भी , ...
बहनचोद ,मादरचोद के साथ पक्का गांडू भी ,... "
कुछ देर तक माँ उन की उस कसी दरार में ऊँगली रगड़ रगड़ के मजा लेती रही , फिर मेरे पास आगयी और मुझसे बोलीं ,
"सिर्फ एक कमी ऐसी मस्त गांड पे , और ये तेरी गलती है।
सोच लोग गोरी गोरी हथेलियों में मेहंदी लगाते है ,पैरों में महावर लगाते है वैसे ही इस गोरे गोरे मखमली चूतड़ गुलाब के फूल खिले रहने चाहिए। ये घर में तब भी ,बाहर जाएँ तब भी , आफिस में हो टूअर पर हों , बस महावर की तरह ,तेरी याद आएगी जबी भी उन्हें वो दिखेंगे क्यों हैं न मुन्ने। "
जैसे उनकी आदत थी मम्मी की हर बात में हाँ मिलाने की ,उन्होंने सर हिला के हामी भर दी। ( बोल तो सकते नहीं थे ,बिचारे उनके मुंह में मम्मी को दो दिन की पहनी ,मम्मी के देह रस में डूबी पैंटी जो ठुंसी थी। )
और मॉम ने मेरे कान में समझा दिया की क्या करना है।
उन्होंने मुझे एक दस्ताना भी दे दिया पहनने को ,एकदम मिट्स की तरह था ,रेड लेदर ग्लव विद वेलक्रो फासेनर।
" पूरी ताकत से ,... "मुझसे बोलीं वो।
मैंने पहला हाथ लगाया ,लेकिन ज्यादा जोर से नहीं ज्जहां से नितंब शुरू होते हैं वही।
मॉम ने मुझे घूर के देखा और डांटा ,
" हे कोई यारी नहीं चलेगी ,ये नहीं काउंट होगा ,चल फिर से शुरू कर "
और उनसे बोलीं ,
हर स्पैंक के बाद ,तुझे नम्बर बोलना होगा , १ ,२ , ३ और साथ में अपनी माँ के नाम एक मस्त गाली।
अगर ज़रा भी हलकी हुयी न तो सोच ले मैं सबेरे की ट्रेन से वापस ,
अचानक मॉम को याद आया उनके मुंह में तो मम्मी की अगवाड़े पिछवाड़े के हर तरह के रस में भीगी पैंटी ठुंसी हुयी है। और मम्मी ने उनके मुंह से पैंटी निकाल ली।
और इस बार मेरा हाथ एकदम ऊपर तक गया ,और फिर ,...चटाक
दर्द से निकलती चीख को उन्होंने किसी तरह दबाया और बोला ,एक और फिर मम्मी की समधन के नाम मोटी सी ,
मम्मी ने खुश हो के मेरी ओर देखा ,
दूसरा भी उसी जगह लगा ,लेकिन पहले से भी तगड़ा और वहां पर हल्का गुलाबी रंग खिल उठा ,
फिर और ऊपर
और उपर
दसवां सीधे गांड के छेद पर ,
दस बाएं चूतड़ पे और दस दाएं चूतड़ पे
लेकिन असली ताकत तो मम्मी के हाथ में थी ,उन्होंने तो बिना दस्ताने के ,मुझसे दस गुनी ताकत से
लेकिन साथ साथ मम्मी की आँख से कुछ बच नहीं सकता था ,
मेरे कान में बोलीं
" देख बहनचोद को कितना मजा आ रहा है , " उन्होंने उनके निप्स की ओर इशारा किया ,
" एकदम टनाटन हैं न "
सच में ,और अब तक मैं सीख गयी थी मेल अराउजल की सबसे बड़ी साइन है ,निप्स।
लेकिन अब उनकी चीख चिलाहट भी चालु हो हो गयी थी।
" अरे अगर गौने की रात दुल्हन चीखे चिलाये नहीं ,पूरे घर में उसकी चीखने की आवाज न गूंजे तो सास ननद क्या सोचेंगी। यही न की मायके में अपने भाइयों से फड़वा के आ रही है ,चीखने दे इसे। तभी तो गौने की रात का मजा आएगा। "
मम्मी बोलीं ,और अब हाथ की जगह उन्होंने टेबल टेनिस का बैट मुझे थमा दिया था।
और फिर मेरे बाद मॉम का नम्बर।
तीस चालीस मिनट तक बारी बारी से , और फिर मम्मी ही रुकीं बोली देख अब इस बहन के भंडुए की गांड का सिंगार पूरा हो गया है न।
पूरा गुलाबी ,कहीं कहीं लाल भी ,एक इंच जगह नहीं बची थी जहाँ हमारे हाथ के निशान न हो।
लेकिन मेरा दिमाग भी तो शैतान की चरखी ,...
मैंने वाटरप्रूफ इन्डेलिबिल क्रेयान उठाये और उनके पेट पर लिख दिया मोटा मोटा ,
रंडी ,बहनचोद।
मम्मी को मजा आ गया लेकिन उन्होंने उनके गांड के छेद की ओर इशारा किया
" असली चीज तो ये है। "
और हम दोनों ने मिल के उसे फैला दिया ,
फिर तो उसके चारो और ,एकदम कसी गुलाबी चूत की तरह दोनों ओर लोवर लिप्स मैने पेंट किये ,खूब मांसल
और एक तीर का निशान बना के लिख दिया
" कंट"
मम्मी उसे रगड़ते हुए उन्हें समझा रही
"ये तेरी मेल चूत है इसे एकदम मस्त रखना ,साफ़ सुथरी ,मुलायम और रोज ऊँगली डाल के अंदर तक वैसलीन ,.. क्या पता किस दिन इसका नंबर लग जाए , और फिर मैं चेक भी करती रहूंगी। जैसे तेरी बहन अपने चूत को मक्खन की तरह मुलायम रखती है न एकदम उसी तरह ,समझ गयी। "
उन्होंने जोर से हामी में सर हिलाया।
" यार इसका एक घर का नाम भी रख देते हैं न पुकारने का ,.. "
pyarजोरू का गुलाम भाग ४३
मम्मी
और जब वो मम्मी के पास लौटे तो ढेर सार काम उनका इन्तजार कर रहे थे।
पहला तो शापिंग बैग खोलना ,
फिर सामान अरेंज करना।
पहले तो साड़ियां वो भी एक दो नहीं पूरी चार , और साथ में मम्मी की क्विज़ उनसे ,
बोल क्या है सिल्क ,कौन सा सिल्क कोस ,टसर,
और गनीमत थी उन्हें १० में १० मिले वरना आज मम्मी उनके सारे खानदान की,...
फिर बाकी कपडे ,
वो बोल तो नहीं रहे थे लेकिन हर पैकेट खुलते उन्हें लग रहा था शायद उनके लिए कुछ होगा ,लेकिन मेरा या मम्मी का सामान निकलता।
बिचारे और ऊपर से साडी हो
या शलवार सूट ,मम्मी ट्राई उन्ही के ऊपर कर के देखतीं और फिर बोल देतीं ,
" देख ये कैसे लगेगा अच्छा न तेरी बीबी के ऊपर "
जब आखिरी पैकेट बचा था तो मम्मी ने सबसे कठिन काम उनको सौंप दिया ,
" अरे सुन ज़रा ये सब साड़ियां ड्रेसेज तहिया के कबर्ड में रख दो और फिर चाय ज़रा कड़क बना लाओ। "
बिचारे सब साड़ियों की तह हमने खोल के रख दी थी ,एक एक उन्होंने फिर से ठीक से अरेंज की।
मम्मी अपनी तेज निगाह से देख रही थीं उन्हें ,लेकिन इसमें भी उन्होंने कोई गलती नहीं की ,
और फिर थोड़ी देर में चाय।
उनकी निगाह बार बार उस अनखुले पैकेट की ओर दौड़ रही थी।
" तेरे माल के लिए लाये हैं , तूने मम्मी को उसकी साइज बतायी थी न ३२ सी बस एक दम उसी साइज की , चाहो तो उसे फोन कर के बता दो "
मैंने छेड़ा उन्होंने
लेकिन मम्मी भी उन्होंने जोर से घूरा मुझे , मम्मी की यही बात , ...
उनका बस चले तो हरदम आपने दामाद की ऐसी की तैसी ,लेकिन कोई दूसरा एक बोल ,बोल के तो दिखाए।
उन्होंने जोर से मुझे घूरा और चाय की प्लेटें मुझे ले जाने को बोला।
और जब मैं लौटी तो उनके पैकेट खुल चुके थे
टी शर्ट्स ,शर्ट , और एक दो फार्मल शर्ट भी।
मम्मी उनके पैकेट खोलने के बाद उन्हें खोलने पे तुली थीं।
"अरे तेरा सब कुछ देख तो चुकी हैं हम दोनों ,चल पहन के दिखा न। "
वो पीछे पड़ीं थीं। उनके हाथ में टी शर्ट थी एक हाथ ,आफ कोर्स पिंक।
जब उन्होंने पहन लिया तो मैंने शीशे में दिखाया , पीछे का हिस्सा, उसपर लिखा था ," प्योर बॉटम। "
बाकी टी शर्ट्स भी पिंक थी और सब पे इसी तरह, ' लव बोनी थिंग्स , हार्डर द बेटर " " कम इन हार्ड " इसी तरह के एक से एक।
और फिर जीन्स जो लेडीज थी और मम्मी ने एक कमजोर सा बहाना बनाया ,
" तेरा नम्बर नहीं मालुम था तो इसी के नाप का ले लिया , वैसे भी तू इसके सारे कपडे तो पहनता ही रहता है। "
यहाँ तक तो गनीमत थी लेकिन मम्मी ने उनको वो जीन्स पहना भी दी।
सच बोलूं तो पिंक टी और जीन्स में बहुत मस्त लग रहे थे। उनका बबल बॉटम एकदम चिपका साफ़ साफ़ झलक रहा था।
बॉक्सर शार्ट्स ,साटन के ,मेल थांग और भी उस तरह की मेल लिंजरी
इसके अलावा और भी ट्रिंकेट थे ,दो बियर के मग्स भी मम्मी ने इनके लिए , लिए थे , एक पर एम् सी लिखा था और दूसरे पर बी सी।
" मेरी समधन और इसकी ननद के ऊपर चढ़ने में तो अभी कुछ टाइम है तो तब तक , इसी से गम गलत करना। "
मम्मी ने बड़े गंभीर ढंग से उनसे बोला।
सामान समेटते हुए उन्हें लगा की काम ख़तम हो गया लेकिन मम्मी तो मम्मी है न।
उन्होंने लगा दिया काम पे ,
" अभी तो खाना में देर है ,सुन वो चारों साड़ियां हैं न उन पे ज़रा फाल टांक दे। सुबह तूने बहुत अच्छा टांका था ,बस वैसे। "
और मेरा हाथ पकड़ के मम्मी उठ गयी ,हम दोनों लाउंज में आगये थे उनका कुछ सीरियल छूटा हुआ था
एक डेढ़ घंटे बाद फाल टाकने का काम ख़तम हुआ ,फिर माम को अचानक जल्दी लग गयी।
वो किचेन में कुछ स्नैक्स बना रहे थे की मम्मी ने मुझे भी भेज दिया।
" ज़रा तू भी हेल्प करा दे न जल्दी हो जायेगी। "
घडी की ओर देखते वो बोलीं।
और कुछ देर में खुद भी किचेन में दाखिल हो गयीं , बोलीं
" अरे सवा आठ बज रहे हैं ,बोलो कुछ हेल्प करना हो मैं करा दूँ। "
" मम्मी आज आप को बड़ी जल्दी मच रही है ,कोई खास बात है क्या "
मैंने चिढाया उन्हें।
" हाँ हैं न बड़ी ख़ास बात है आज " उनके नितम्बो को सहलाते हुए उन्होंने अपना इरादा जाहिर कर दिया।
वो ब्लश कर रहे थे। पर मम्मी उनके ईयर लोब्स से अपने होंठ छुलाती बोलीं ,
" कुछ लाइट बना लो ,कुछ भी पर जल्दी। मैं हेल्प करा देती हूँ। पराठा सास भी चलेगा। "
" मम्मी आज तो आप का कोई सीरियल भी नहीं आता है न तब भी ,... " पराठे के लिए आटा गूंथते मैं बोलीं।
मम्मी का हाथ अभी भी उनके नितंबों पर था ,एक ऊँगली उन्होंने जोर से बीच की दरार में घुसाते हुए बोला ,
" है न , आज हम सब खुद सीरियल बनाएंगे , एकदम हॉट। "
लेकिन पंद्रह मिनट में उनकी प्लानिंग फेल हो गयी। बड़ा लंबा सा मुंह मम्मी ने लटकाया लेकिन ,
Amazed by the humbleness, with which you took the compliment.Thanks so much for the nice words. I feel no brickbats means bouquets. I realise that Hinglish generates more views as it expands the readers base, but I am not comfortable writing or reading Hinglish. I prefer to express myself either in Hindi or in English. Secondly, I feel only making views or likes as a criterion for what i write is doing commodification of story.
readers like you are rare and it gladdens my heart when once in a blue moon, dame luck smiles on me and some discerning reading like you bless the thread with his presence. Please keep on gracing this thread, Thanks .
Ekdam nahiHope ap bura nahi manegi maine abhi shuru kiya hai mere coments kabhi bure bhi ho sakte hai asha karta hu ap ko bura nahi lagega
Thanks for reading the storyBhadwa bana rahi maa apni beti ke liye or chutiya mard ban Raha hai
bas kahaani ke saath bane rahiye dekhiye aage kya kya hota hainPati ke sath thoda jyada nahi ho raha
Ek baat janna tha kya sach me patni apne pati se pyar karti hai ki shirf ek shart jitne ke liye vo ye sab kar rahi hai kya vo abhi apne pati ko dusri aurto ke sath sula kar usko baad me insult feel kareygi or use gay bane par majboor karegiEkdam nahi
ap samay nikaal ke story ko padh rahe hain aur jis part pe jaisa bhi lag rha hai us ke baare men likh rahe hain to ye to acchi baat hai
story ilkhne ke baad vo readers ki ho jaati hai , isliye main apni story ko na defend karti hun na justify , acchi to readers ki aur nahi acchi to readers ki
ek baar fir se thanks
Sach me ab story female domination par agey hai ye galat hai ladka sab man raha hai nokrani Ko itna sar chadha liya ki damad ki respect hi nahi aisi sas to nahi dekhi Maineखतरा, ...इनके पिछवाड़े पर
आखिर उनकी जीत मेरी भी तो जीत थी ,
और असली बात ये थी की उनकी जीत सच में उनकी हार थी , वो हार जो मैं कब से चाहती थी ,
और मंजू बाई ने अपने अंदाज में वो बात खुल के बोल भी ,
" चलो मान गए तेरी ताकत , बिना झड़े हम दोनों को ,और वो भी मुझे दो बार ,चल इनाम में सच में तुझे मादरचोद , .... "
उसकी बात काट के उनकी सास बोलीं ,
" अरे मंजू बाई अब तो मेरी समधन मान भी गयी है , बस पंद्रह बीस के दिन अंदर वो खुद यहीं आ रही है , ... "
और एक बार फिर मेरी मॉम और मंजू बाई मिल के मेरी सास की ऐसी की तैसी करने में जुट गयीं।
मंजू बाई दो बार ,मॉम भी एक बार ,...
इसलिए चुदाई का मूड तो दोनों में से किसी का नहीं था इतनी जल्दी ,लेकिन जो मुझे डर था वही हुआ ,
दोनों उनकी चिकनी कुँवारी कोरी कसी गांड के पीछे पड़ गयीं।
मॉम ने तो ८ इंच का स्ट्रैप आन डिल्डो पहन भी लिया
और मंजू ने जबरदस्ती उन्हें पटक के पेट के बल लिटा भी दिया ,
मैंने लाख कहा ,
डर से उनकी हालात खराब ,
लेकिन मैंने जब अपने दिल की बात मॉम से कही तब जाके वो मानीं ,
" अरे मम्मी ,आपका इकलौता दामाद वो भी इतना चिकना ,मस्त नमकीन माल और उसका इतना कसा कसा कोरा पिछवाड़ा ,
उसकी नथ किसी प्लास्टिक ,या रबर के बने , ... से उतारी जाय। अरे उसके गांडछेदन के लिए तो
एक एकदम मोटा कड़ा ,गदहे और घोड़े को मात करने वाला हथियार होना चाहिए
और वो भी उस लौण्डेबाज का जिसने गांड मारने में पी एच डी कर रखी हो ,
और पहली बार गांड मार के ही आपके इस लौंडिया छाप दामाद को पक्का गांडू बना दे। "
मॉम एक दो पल के लिए हिचकीं ,
उधर मंजू बाई अपने दोनों हाथ के अंगूठों से उनके गांड के कसे छेद को पूरी तरह फैला के खड़ी थी।
हिचकिचाते माँ ने मेरी बात तो मान ली पर बोलीं ,
" तेरी बात में तो दम तो है लेकिन तुझे मिलेगा कहाँ से ऐसा लौंडेबाज , ...
और खबरदार जो मेरे इस दामाद के लिए इससे ( अपने ८ इंच के डिल्डो वाले स्ट्रैप आन की ओर इशारा करते ) कम साइज का ढूंढा ,
गौने की रात को कोई कमसिन दुल्हन जैसे चिल्लाती है न वैसे ही चिल्लाना चाहिए ये,और,.. "
मालुम तो मुझे भी नहीं था की कहाँ मिलेगा मम्मी के दामाद के नथ का उतरैया , पर बोल दिया तो बोल दिया।
अभी तो मुझे अपने उनकी गांड की रक्षा करनी थी इस भयानक गांड फाडू डिल्डो से ,और मैंने मम्मी की बात काटते उन्हें फिर समझाया ,
" अरे मम्मी इस चिकने को फाड़ने वाले बहुत मिलेंगे , ऊपर से आपकी ट्रेनिंग। आप मेरे ऊपर छोड़ दीजिये , बहुत जल्द ,... "
लेकिन मॉम आखिर मेरी भी मॉम थी , उन्होंने मेरी बात पकड़ ली।
" पक्का ,लेकिन दो बातें , मैं जब पंद्रह दिन में आउंगी न तेरी सास के साथ , तो उसके पहले इस लौंडे की फट जानी चाहिए।
और दूसरी बात उसकी फोटो ,वीडयो सब मेरे पास नहीं तो तेरी सास को यहाँ लाने का , प्रोग्राम कैंसल। "
मेरी ऊपर की सांस ऊपर ,नीचे की नीचे।
ये तो मेरी कबकी फंतासी थी की मेरी सस्कारी सास , और मम्मी का संस्कारी दामाद , घचाघच घचाघच ,
मेरे सामने और सब कुछ स्टिल ,वीडियो ,...
इन्हें मादरचोद तो बनाना ही था और बिना मॉम की हेल्प के ये हो नहीं सकता था।
मुझे तुरन्त जवाब देना था और साथ में कुछ अडिशनल ऑफर भी ,
" एकदम मम्मी ,बहुत जल्द , और साउंड लाइट के साथ पिक्चर आपको व्हाट्सअप करुँगी ,इनकी सारी चीखें भी ,
और हाँ बार इनकी नथ असली औजार से उतर जाये न फिर तो जो आप सुपर डुपर १० इंच वाला लायी हैं न उससे इनकी भी ,
इनकी माँ की भी , ... लेकिन मम्मी इनको आपको ट्रेन करना पडेगा। आप ऐसी गुरु इन्हें कहाँ मिलेगी। "
५०० ग्राम मक्खन काम कर गया।
मैंने मम्मी से प्रॉमिस तो कर दिया था , ...लेकिन कहाँ से ढूंढूंगी , इनकी नथ उतारनेवाले को , ....कम से कम आठ इंच वाला और वो भी लौंडेबाज़ी में एक्सपर्ट,... मुझे कुछ कुछ याद आ रहा था , ... है तो कोई ऐसा , ... जानती भी हूँ मैं , लेकिन ,... और उसके बिना मेरी सास पर मेरी मम्मी के दामाद का चढ़ने का कार्यक्रम खतरे में पड़ता दिख रहा था , लेकिन मैंने सर झटक दिया ,... मुझे अपनी सास की तो ,... भले ही कहीं से भी ढूंढ के सास के बेटे के पिछवाड़े की ,
और सबसे बड़ी ये थी ,... अभी तो ये बच गए ,
गाँड़ बची तो लाखों पाए ,...
इन्होने चैन की सांस ली ,...
मालूम इन्हे भी था और मुझे भी ये ज्यादा दिन नहीं बचने वाली है , अगर इनकी सास ने ठान लिया है तो
मम्मी मान गयी ,
" चल तू कह रही है तो और , उस में भी उसे ट्रेन करदूँगी , लेकिन मेरे आने के पहले फोटो और वीडियो सब , और उसके बाद मैं कुछ नहीं सुनूँगी। "
एकदम ,मैं बोली और मेरी सांस में सांस आयी।
मम्मी ने ५-१० हाथ जोरदार उनके माखन सी चिकनी गांड पे लगाए , गुलाब वहां खिल उठे और मॉम बोली ,
" चल आज तो तू इस से बच गया लेकिन ज्यादा दिन ,जल्द ही फटेगी तेरी। "
लेकिन मंजू बाई कहाँ छोड़ने वाली थीं उनको ,
" अरे मोर उंगलिया ही काफी हैं चल अभी इसको गांडू का मजा चखाती हूँ "
और गांड की दरार पर वो अपनी ऊँगली रगड़ने लगीं।
फिर मम्मी क्यों बख्शतीं उनको
,"चल तेरा पीछे का छेद बच गया तो बच गया , आगे का नहीं छोडूंगी। चल गांडू चाट मेरा लन्ड ,चूस अगर ढंग से चूस दिया न तो देखना खूब मोटे मोटे लन्ड मिलेंगे तुझे चूसने को मेरी गारंटी। "
चूसवाने की प्रैक्टिस तो मैंने ही उनकी शुरू करवाई थी , और डिटेल्ड इंस्ट्रक्शन के साथ ,
Par gand marvana jaruri hai madam bass itna bata de jo pati itna pyar karta hai jisne ap ki kushi ke vo sab kiya jo ap ne kaha apki kushi ke liye nokrani tak se galiya khey na shirf nokrani uski beti bhi phir bhi kya ye jaruri hai bass ye jana hai ap ne to story age badha di hai ye pata hai kya kya ye jaruri tha jis sas me ap ka sath diya uske sath jo ap age likh chuki hai vo jaruri tha shirf ek ego ke liyeमान मनुहार
कमल जीजू , अजय जीजू और रीनू उसी कमरे में बैठे थे , जहां मेरी , ... और सब एकदम चुप , मुझे देख कर भी कोई कुछ नहीं बोला ,
"जीजू , सॉरी " खूब चेहरा बनाकर दोनों कान मैंने पकड़ लिए और कमल जीजू के सामने उदास खड़ी हो गयी ,
कुछ देर तक तो कमल जीजू सीरियस रहे , लेकिन अंत में उनके चेहरे पर मुस्कान फ़ैल गयी , और मुझे हड़काते बोले ,
" स्साली , क्या तय हुआ था "
उनकी शादी में ही एक बार जीजू ने मेरी चोली में हाथ डाल दिया था
और मैंने घूर के देखा तो उनके मुंह से 'सॉरी ' निकल गया बस उसी समय मैंने उन्हें हड़का लिया था ,
ये कह के जीजू साली में 'सॉरी ' नहीं बोलते।
बस उनका ये याद दिलाना काफी था और मैं सीधे उनकी गोद में बैठ गयी और उन्हें मनाने का जो तरीका था एक चुम्मी सीधे लिप पर और उनके हाथ जसिके पीछे पहले दिन से वो दीवाने थे ,
मेरे जोबन पर , ...
" आप गुस्सा हो न " मैंने पूछा ,
हूँ , लेकिन तुमसे नहीं , ... " उन्होंने कबूला।
"चलो मेरा प्रॉमिस , आज नहीं हुआ तो क्या , सैंडविच बनेगी मेरी आप दोनों जीजू से , ... पक्का , एकदम। .. "
मैंने प्रॉमिस किया , ...
" और वो ,... "
अबकी अजय जीजू बोले ,
" उन्ही के सामने " ...
मैंने साफ़ साफ़ बता दिया ,...
" आज तेरी गांड बच गयी , फिर ,... अगर कही वो ,... "
कमल जीजू ने अपना शक बता दिया
" अरे जीजू , आप उसकी गांड पहले मार लीजियेगा , सिम्पल "
मैंने उपाय बता दिया , ... और आगे समझा भी दिया ,
" मुझे मालूम है आपकी पसंद , अगर एक बार उसकी गाँड़ मार लीजियेगा , फिर तो किसी की गांड मारिएगा वो बीच में नहीं आएंगे , ... "
मैंने फिर बोला ,
और मेरी बहन रीनू भी साथ में आ गयी।
" एकदम जीजू , निहराऊंगी मैं " वो बोली
" और पकड़ कर सटाउंगी मैं , बस धक्का आपको मारना होगा , वो भी बिना तेल के ,... " मैंने और बात बढ़ाई। "
देखा है मेरा , बिना तेल के , ... फट जाएगा उसका "
अब जीजू थोड़ा मुस्कराये।
" अरे ये कौन सी बड़ी बात है , अभी खोल के देख लेती हूँ , "
उनकी जींस के ऊपर से कितनी बार दबा के , पकड़ के मसल के देख चुकी थी ,
तो आज मैंने ज़िप खोल कर बाहर निकाल लिया पकड़ भी लिया ,
जी एकदम धक्क से रह गया , खूब मोटा , मेरी कलाई में समा नहीं रहा था ,
जब की अभी वो मोटू सो रहा था , अगर ये न आये होता तो ये मोटू इस समय मेरे पिछवाड़े घुस रहा होता ,
" ठीक है चलो जीजू , थूक मैं लगा दूंगी , एकदम आर्गेनिक ,.. आपके भी उनके भी , "
रीनू ने रास्ता निकाला।
" और फट जायेगा तो फट जाएगा , ... मैं तो चाहती यहीं हूँ जीजू एक बार आप हचक के फाड़ दीजिये , फिर आप जित्ती बार जैसे , जैसे सैंडविच बनायें , .. उनके सामने, आपकी स्साली भागेगी नहीं , ... लेकिन अच्छी तरह से फाड़ियेगा , तीन दिन तक टांग फैला के चले ,... " मैं मुठियाते बोली ,
" एकदम कोमल सही कह रही है , फिर उसके बाद हम साली जिज्जा का प्रोग्राम कभी कोई भड़भंग नहीं करेगा , .... "
रीनू ने बोला।
तब तक तीन बार ये नीचे से गुहार लगा चुके थे ,
हाँ घर लौटने लौटने पर उन्हें अंदाज लगा गया था उन्होंने जो किया वो ठीक नहीं किया और फायदा मेरा हुआ , ...
मेरी जेठानी के लाख कोशिश करने पर भी मैं इनके साथ इनकी पोस्टिंग पर चली आयी ,
और उस के बाद क्या हुआ , कैसे ये बदले ये तो आपने शुरू से देखा ही ,
मुझे उस समय अंदाज तो लग गया था लेकिन बाद में पता चला सारी करतूत मेरी जेठानी की थी ,
उनका एक बड़ा प्लान फेल हो गया था , इसलिए सारी कुढ़न गुस्सा मेरे ऊपर,
वो चाहती थी मैं इनके मायके में रहूं , उनकी सेवा करूँ और सबसे ज्यादा उन्हें मौका मिले मुझे जलाने का , मेरी औकात दिखाने का,
जबसे उन्हें पता चला था की मैं अपने मौसेरे भाई की शादी में गयी हूँ, बस पहले तो मेरी सास को चढाती रहीं,
" झूठी उसकी माँ, यहाँ से मायके के लिए कह के गयी थीं, और,... मुझे मालूम नहीं वहां क्या मस्ती हो रही होगी , अरे उसे बुलाना था , उनकी मौसी को आपसे मुझसे बात करना चाहिए था, पूछना चाहिए था, ...अब शादी हो गयी है , वो इस घर की बहु है , लेकिन नहीं,... और फिर अगर जाना भी था तो यहाँ आके , एकाध दिन के लिए , ये क्या,... "
और उसके बाद अपने देवर के पीछे ,... और साथ में एक उन्होंने कुछ पूजा की एक नयी कहानी शुरू कर दी , जिस दिन रिसेप्शन था उसके ठीक अगले दिन,...
हर दो घंटे पर फोन घुमाती कहतीं तू तो एकदम जोरू का गुलाम हो गया है , हम लोगों को भूल गया है , कल अगर तुम दोनों पूजा में नहीं आये, संस्कार इस घर का और न जाने क्या , क्या ,...
इसलिए वो इतने अलफ़ थे
लेकिन जेठानी नहीं जानती थी किससे पाला पड़ा है , कोमलिया से ,...
मैंने उनका पैर छुआ गलती मानी , लेकिन इन्हे पटाया की मैं आपके साथ चलूंगी ,... ( मन तो इनका भी करता था, रोज खूंटा तंग करता था और इधर उधर मुंह मारने की न इनकी आदत थी न हिम्मत , नथ इनकी मैंने ही उतारी थी। )
सबसे अच्छी बात मेरी सास ने मेरा साथ दिया , और मैं इनके साथ आ गयी ,...
उसके बाद बाद क्या हुआ ये सब तो आप पढ़ ही चुके हैं ,
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