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Adultery पापी परिवार की बेटी बहन और बहू बेशर्म रंडियां

Hkgg

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दोपहर के 1बजे धर्मवीर सुबह शालु के साथ हुई हरकत को याद कर गर्म हो जाता है और धर्मवीर शालु के बारे में सोच मुठ मार कर अपना माल बेड पर ही छोड़ा देता है तभी किसी ने डोर पे नॉक किया।।

धर्मवीर ने दरवाजा खोला तो देखा उसका पोडासी शमशेर आया था।

धर्मवीर - समशेर तुम 5 मिनट वेट करो मैं अभी आता हू।

शमशेर -(बेड पे बैठा हुआ।। ) हाँ मैं वेट करता हूँ जल्दी आओ।
(शमशेर बेड बैठा ही था की उसकी नज़र वाह पड़े धर्मवीर के माल पर गई )

तभी धर्मवीर कमरे में आया तो देखा। शमशेर बेड पे आँखे गड़ाए हुए था। धर्मवीर को कमरे में आता देख।

शमशेर- धर्मवीर। ये क्या है बेड के बीच में?

धर्मवीर - (अनजान बनते हुए।। ) पता नही

शमशेर - ।।। झूठ मत बोल।। सच बता ये तेरी करतूत है न?

धर्मवीर - क्या बोल रहे हो?

शमशेर - मैं अच्छी तरह जानता हूँ ये क्या है? बोल सच सच?

धर्मवीर - हा।।मेरी मूठ है

शमशेर - ऐसा क्या हुआ कल जो तूने बेड पे मास्टरबैट कर लिया।। सच बोल

धर्मवीर - कुछ नहीं बस ऐसे ही मन किया

शमशेर - किसके बारे में सोच के किया? बोल?

धर्मवीर - तू जानता है यार। (धर्मवीर टॉवल से मुह पोछते हुए बोला।।)

शमशेर - क्या तूने गुंज़न ।। मतलब अपनी बहु के बारे में सोच मास्टरबैट किया?

धर्मवीर - (गर्दन झुकाते हुवे।।) हाँ

शमशेर - वो।।

शमशेर - तेरी बहु है ही ऐसी । देखा आखिर तूने भी उसके नाम की मूठ मार ही डाली। साली है हे ऐसे चीज़।। उसके बारे में सोच तो मैं रोज़ मूठ मारता हूँ

धर्मवीर - सच कह रहा है तु।। मुझसे भी कण्ट्रोल नहीं होता उसकी भरी जवानी देख कर।

शमशेर - तो कितनी बार मास्टरबैट करता है।। ? कभी उस के सामने रह कर किया?

धर्मवीर - बार एक दिन में मुट्ठ मारता हूं।। और कई बार बहु के बेड पे भी गिराया है।।

शमशेर - धर्मवीर क्या बोल रहा है।।। बहु के बेड पर???? (
धर्मवीर ने देखा शमशेर का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था। )

धर्मवीर - बहु की बड़ी बड़ी चूचियां, उसकी मांसल जाँघें और मोटी गांड मेरे दिमाग में रात दिन घूमति हैं और मैं मुठ मारने पे मजबूर हो जाता हूँ।।

शमशेर - न जाने कितने लोग तेरी बहु को देख मुट्ठ मारते होंगे।। तू किस्मत वाला है जो वो तेरे सामने है कभी मुझे भी उसके अधखुले जिस्म का मजा उठाने दे।
कभि मैं भी उसको सामने देख मुठ मारूँगा।। (ये कहते हुए शमशेर लोअर के ऊपर से अपने लंड को मसलने लगा)

शमशेर - साली तेरी बहु का नाम लेते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है।। आज तो उसकी गांड देख के मूठ मारने का मन है।।

शमशेर - बहु अपने कमरे में सो रही है क्या?

धर्मवीर - हाँ अभी सो रही होगी, मैं उठाता हू।

शमशेर - रुक मैं भी आता हूं।। मैं देखूँ बहु सोती कैसे है?

धर्मवीर और शमशेर गुंज़न कमरे में गये। कमरे में गुंज़न केवल एक वाइट कलर ब्रा पहने और ब्लैंकेट के अंदर सो रही थी।
वो दोनों उसकी नंगी पीठ और नवेल नज़र आ रही थी।

शमशेर की नज़र लगातार गुंज़न के नवेल पे थी।जीसको देख शमशेर अपने लंड मसल रहा था।

शमशेर - धर्मवीर।। दिल करता है लंड बाहर निकाल के तेरी बहु के गांड और नंगी कमर देखते हुए मास्टरबैट करूँ ।

जब वो दोनों बात कर रहे होते है तभी गुंज़न की भी उठ जाती है पर वो बिना हिले डुले धर्मवीर और शमशेर की बाते सुन रही थी

धर्मवीर - पागल हो गया है तू? यहाँ ?

शमशेर - हा।। तूने तो बहुत मज़े लिए हैं अब मुझे उसकी गांड का मजा लेने दे।

इससे पहले धर्मवीर कुछ कह पता शमशेर ने अपना विशाल लंड बाहर निकल लिया, और स्किन नीचे कर ऊपर नीचे रगडने लगा। धर्मवीर के सामने उसकी बहु को देख एक पडोसी मुठ मार रहा था।। धर्मवीर को सोच के इरेक्शन होने लगा। धर्मवीर ने देखा शमशेर का लंड बहुत बड़ा था और उसमे से काफी स्मेल आ रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे उसके लंड की स्मेल पूरे कमरे में फैल जाएगी।। थोड़ी देर में शमशेर के लंड का पानी फर्श पे निकल गया।

धर्मवीर शमशेर पकड़ जल्दी से गुंज़न के कमरे से बाहर निकल गया

उन दोनों के जाते ही गुंज़न उठ कर बैठ जाती है और अपने मन में सोचती है(ये बाबूजी तो बहौत बड़े ठरकी निकले खुद तो अपनी बेट को देख कर अपना हिलाते ही थे और अब अपने पड़ोसी को भी मज़ा दिलाने लगे)

धर्मवीर की इस हरकत से गुंज़न बहुत जयदा गरम हो जाती हैं

तभी सोनू भी अपने स्कूल से वापस आजाता हैं और
सोनू घर आकर बैठा ही था की गुंज़न सोनू का हाथ पकड़ के उठा दिया और अपने रूम मे ले जाने लगी...वो किसी पतंग की डोर की तरह गुंज़न के साथ बिना किसी विरोध के चल दिया..रूम मे आते ही
गुंज़न ने जल्दी से दरवाजा लॉक कर के सोनू से लिपट कर उsके होंठो को जल्दी जल्दी चूमने लगी उसके ऐसा करने से ही पता चल रहा था कि वो बहुत ज़्यादा चुदासी हो चुकी है

सोनू भी गुंज़न से लिपट कर उसके होंठो को चूमने चाटने लगा.....गुंज़न भी पूरी चुदासी होकर सोनू का साथ दे रही थी....होंठो को चूस्ते हुए सोनू एक हट गुंज़न के ब्लाउस पर ले गया
सोनू—भाभी चुचि दबा लूँ आपकी थोड़ा सा

गुंज़न- हाँ दबा ले ….जितना मन करे उतना दबा ले….रोज दबा दिया कर मेरे दूध…मैं कभी तुझे अपने दूध दबाने से नही रोकूंगी

किस करते हुए सोनू गुंज़न के ब्लाउस के उपर से ही दोनो चुचियो को अपने हाथो मे भर लिया और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा
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गुंज़न –आअहह...सोनू....आआअ

सोनू—क्या हुआ भाभी..... ?

गुंज़न—इतनी ज़ोर....से.....आआअ.....मत दबा....थोडा...धीरे..

सोनू—चुचि दबाने का मज़ा तो ज़ोर ज़ोर से ही है .......ये तो बनी ही दबाने के लिए हैं

फिर सोनू ने गुंज़न के ब्लाउस के बटन खोल कर ब्रा को उपर कर दिया और उनकी नंगी चुचियो क निपल को मूह मे भर के चूसने और मरोड़ने लगा...

गुंज़न—आअहह....ऐसे ही...सोनू....आअहह.....बहुत....मज़ा..आ रहा है.....और दबाओ....मेरी चुचि को.....ऐसे ही....चूसो....दोनो को चूसो ......बहुत अच्छा लग रहा है.....पहले क्यो नही ऐसा मज़ा दिया मुझे....अब रोज ऐसे ही...रगड़ना मुझे अब
जल्दी से ले ले मेरी बुर….नही तो मैं आज भी चुदासी रह जाउन्गी

सोनू —नही भाभी…….अब आप कभी चुदासी नही रहोगी……मैं हूँ ना आपकी बुर् चोदने के लिए

गुंज़न —मेरा बहुत मन करता था तुझे अपनी बुर दिखाने का……मैं रोज यही सोचती थी कि काश तू मुझे कही पटक कर चोद डाले ज़बरदस्ती……मुझ से खूब गंदी गंदी बाते करे…….. दिन भर मुझे खूब गंदा गंदा बोले …..मेरे दूध दबा दिया करे कभी भी…..कभी भी मेरी
साड़ी उठा कर बुर देख लिया करे……कभी भी मेरी मे लंड घुसेड दिया करे….मुझे रोज 8-10 बार पूरी नंगी किया करे

सोनू—पहले आपको नंगी करके बुर तो देख लूँ…फिर बताता हूँ

गुंज़न —अभी नंगी मत कर…..सब लोग हैं…..अभी साड़ी उपर कर के देख ले मेरी बुर…….सब के जाने के बाद जी भर के तू अपने हाथ से मुझे नंगी कर लेना....मुझे तेरे हाथो से नंगी होना अच्छा लगता है……अभी तो साड़ी उठा के जल्दी से बुर को चोद दे…सोनू

सोनू ने भी गुंज़न की बात को मानते हुए उन्हे बिस्तर मे लिटा कर साड़ी और पेटिकोट जाँघो से उपर कर दिया…..साड़ी उपर होते ही की गुंज़न गोरी मांसल जांघे और दोनो जाँघो के बीच छोटी छोटी काली घुंघराली झान्टो से भरपूर बुर पूरी नंगी होकर सोनू के सामने आ गयी…..बुर एकदम कचौरी की तरह खूब फूली हुई थी

सोनू ने जैसे ही गुंज़न की बुर पर हाथ फेरा तो गुंज़न चिहुक उठी मारे आनंद के...हाथ फेरते हुए सोनू ने एक उंगली धीरे से गुंज़न की बुर के छेद मे अंदर सरका दी....उसकी बुर लार टपकाने से पूरी गीली हो गयी थी

फिर सोनू गुंज़न की बुर मे मूह लगा कर जीभ से उसके अमृत रस को पीने लगा....गुंज़न खुशी और मज़े से पागल हो गयी...

गुंज़न —आआहह....सोनू मने ये कर दिया है...मैं तो आज...दीवानी हो गयी हूँ....तेरी.......खा ले...मेरी बुर को....ऐसे ही...इतना मज़ा...है मेरी बुर...मे .....और चाटो
सोनू......मेरे बुर के दाने को और चूसो.....बहुत मज़ा आ रहा
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गुंज़न—अब बस कर..आआहह….…..अब थोड़ा सा अपना भी तो दिखा ना…..मेरा तो सब देख लिया

सोनू (खुश होकर)—लो अभी देख लो भाभी और तुरंत अपना लोवर नीचे खिसका दिया

गुंज़न- सोनू मुझे तेरा लंड चूसना है और सोनू के लंड को अपने मूह मे भर ली और चूसने लगी ..
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गुंज़न—…अभी घर मे सब लोग हैं……कोई भी आ सकता है……जल्दी से कर ले चोद ले ना मेरी बुर...देख तेरे सामने पूरी नंगी है मेरी बुर......मैं तुझे अपनी बर चोदने मे खूब मज़ा दूँगी ....मैं खूब मज़ा दूँगी अपनी बुर् चोदने मे तुझे ...जल्दी से अपना लंड घुसेड के मेरी बुर मे और फाड़ दे आज मेरी बुर को....मुझे बुर चोदि बना दे....जल्दी से मेरी बुर को अपने लंड से चोद

सोनू ने गुंज़न को पकड़ कर अपने नीचे लिटाया और उसके दोनो पैर फैला कर सोनू ने लंड गुंज़न की बुर के मुहाने पर टिका कर घिसने लगा
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गुंज़न - सोनू अब घुसेड दे ना बुर के अंदर....देख नही रहा कि मेरी बुर कितनी चुदासी हो रही है

सोनू—कितनी चुदासी हो रही है.... ?

गुंज़न - मेरी बुर चुदने के लिए बहुत बहुत बहुत ज़्यादा चुदासी हो गयी है...प्ल्स इसमे अपना लंड घुसेड कर चोद दे ना मेरी बुर को

सोनू—आहह... तुझे आज से मैं रोज चोदुन्गा...नंगी कर के

गुंज़न—चोद लेना...जब तेरा मन करे

सोनू गुंज़न की गरम बाते सुन कर जोश मे आ गया और लंड को उसकी बुर के छेद मे टिका कर एक ज़ोर का शॉट लगा दिया…लेकिन वो छिटक कर उपर चला गया

गुंज़न क्या करता है...पकड़ के अच्छे से घुसेड ना मेरी बुर के छेद के अंदर…रुक मैं अपनी बुर की फांके फैलाती हूँ तू घुसेड

गुंज़न ने अपने दोनो हाथो से अपनी बुर की दोनो फांको को खूब चीर कर फैला दिया और सोनू से लंड घुसेड़ने को कहने लगी... सोनू ने छेद पर लंड
लगा के दोनो चुचियो को मजबूती से पकड़ कर कस कस कर जल्दी जल्दी तीन चार धक्के जड़ दिए उसकी बुर मे लंड गुंज़न की बुर को ककड़ी की तरह चीरता हुआ अंदर उसकी बच्चेदानी तक पेल दिय..
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सोनू—मुझे रोज दोगी ना अपनी बुर….?

गुंज़न —हां रोज दूँगी….तू जहाँ बुलाएगा…जिस समय बुलाएगा….वहाँ तुझे अपनी बुर देने रोज आउन्गी….. तुम डेली मेरे पूरे कपड़े उतार के मुझे पूरी नंगी करना….रोज नंगी करना मुझे….मैं तुम्हे रोज खूब अपनी बुर देना चाहती हूँ… बोलो ना ….. लोगे ना मेरी बुर रोज…..

सोनू —आहह... भाभी तुझे आज से मैं रोज चोदुन्गा...नंगी कर के

गुंज़न —चोद लेना...जब तेरा मन करे..अब कुछ कुछ अच्छा लग रहा है…….ऐसे ही चोदते रहो…..जी भर के चोद लो मेरी बुर को ….ऐसे ही मुझे पूरी जिंदगी भर चोदना…

सोनू बिना रुके उसकी दोनो चुचियो को ज़ोर से मीज़ते हुए बुर मे लंड पेलने लगा…..थोड़ी देर मे गुंज़न को भी मज़ा आने लगा तो वो भी अपनी गान्ड उपर उठा उठा कर सोनू का साथ देने लगी
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गुंज़न—थोड़ा और ज़ोर से….पेलो मेरी बुर मे लंड …..आअहह….मैं सारी ज़िंदगी तेरी रखैल बन कर रहने को तैयार हूँ… तू जब चाहे जहाँ चाहे पकड़ के पूरी नंगी कर देना और मेरी बुर मे अपना लंड घुसेड देना…

सोनू—चिंता मत कर मेरी भाभी...चोद चोद कर तेरी फुद्दि का फुद्दा बना दूँगा

गुंज़न—हाँ, चोद चोद के फुकला कर दे मुझे ऐसे ही ..आआआअहह.....चोदता रह मुझे.......आअहह...और ढीली कर दे मेरी बुर......खूब चोद..एयाया

सोनू—तू तो मेरी चुदैल बनेगी

गुंज़न—तेरी चुदैल तो मैं अब बन ही चुकी हू
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बहुत मज़ा आ रहा है....और ज़ोर ज़ोर से चोद....आअहह....खूब दबा मेरी चुचि....आअहह..ढीली कर दे ….अपनी भाभी की बुर को सोनू….रोज चोद चोद के....बोल चोदेगा ना रोज अपनी भाभी की बुर को...

गुंज़न—हाअ....भाभी....आपको रोज नंगी कर के चोदुन्गा

गुंज़न—मुझे डेली हर दो दो घंटे मे नंगी करना राज......मुझे खूब गंदा गंदा बोला करना....आआआअ.....मैं तो तेरी दीवानी हो गयी.....ऐसे ही.....बहुत मज़ा आ रहा है......खूब हचक हचक कर चोद मुझे र......खूब पेल मेरी बुर को........चोद डाल
राज.....चोद डाल.....हाा.....ऐसे ही....ज़ोर ज़ोर से पेलता जा......खूब मज़ा आआ...रहा है.....एयाया

सोनू- भाभी मुझे आपकी गान्ड भी चाहिए......मेरा बहुत मन है आपकी गान्ड मारने का...

गुंज़न—आआआआ.......मार लेना.....अब तो सब....कुछ तेरा है........मैं तो आज से तेरी.....रखैल बन गयी..रे...

सोनू—तो मुझे शालु दीदी की बुर दिला दो ना

गुंज़न—आआआ……तू उसको पकड़ के चोद ले……वो भी बहुत चुदासी लड़की है…..जहाँ थोड़ी देर तक उसके दूध दबाएगा तो वो अपनी बुर तुझे सौंम्प देगी…

सोनू—कहीं उन्होने थप्पड़ जड़ दिया तो…..सीधे मूह तो कभी बात नही करती वो मुझसे…..दूध क्या खाक दबाने देंगी…?

गुंज़न—आआहह……..दूध दबाने देगी……मुझे मालूम है…..वो कयि बार बता चुकी है कि वो तुझ से अपने दूध दबवाना चाहती है…लेकिन तेरे लंड से डरती है क्यों कि तू कहीं चोदने ना लग जाए…….उसका तुझ से अपने दूध दबवाने का बहुत मन करता है…..बिना डरे दबा देना……लेकिन अकेले मे…….वो कुछ नही बोलेगी और कुछ बोलती भी है तो तू दबाते रहना……वो मारेगी नही और ना ही वहाँ से
भागेगी…..बल्कि दबवाती रहेगी अपने दूध…आआआअ

सोनू —ह्बीयायये चाची…….दीदी के दूध बहुत मस्त और खड़े हैं
सोनू कस कस कर धक्के गुंज़न की बुर मे पेलने लगा...
गुंज़न झड़ने की कगार पर आ गयी

गुंज़न- मेरा होने वाला है..

सोनू—आआआ….मैं आया…ले संभाल अपनी बुर मे….आआआआआआ

गुंज़न—आआहह.....हाँ पेल दे, पेल दे, पेल दे… भर दे मेरी चूत, भर दे… भर दे इसे अपने लौड़े के पानी से… भर दे मेरी बुर.......और भर......पूरी टंकी फुल कर दे...आज ही.......पूरा सांड़ है तू.....कितना पानी छोड़ता है.....ये तो बंद ही नही हो रहा........पूरी बाल्टी भर जाएगी तेरे लंड के पानी से...आअहह...मैं भी गयी ..

और सोनू गुंज़न के उपर ढेर हो गया।
 

malikarman

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दोपहर के 1बजे धर्मवीर सुबह शालु के साथ हुई हरकत को याद कर गर्म हो जाता है और धर्मवीर शालु के बारे में सोच मुठ मार कर अपना माल बेड पर ही छोड़ा देता है तभी किसी ने डोर पे नॉक किया।।

धर्मवीर ने दरवाजा खोला तो देखा उसका पोडासी शमशेर आया था।

धर्मवीर - समशेर तुम 5 मिनट वेट करो मैं अभी आता हू।

शमशेर -(बेड पे बैठा हुआ।। ) हाँ मैं वेट करता हूँ जल्दी आओ।
(शमशेर बेड बैठा ही था की उसकी नज़र वाह पड़े धर्मवीर के माल पर गई )

तभी धर्मवीर कमरे में आया तो देखा। शमशेर बेड पे आँखे गड़ाए हुए था। धर्मवीर को कमरे में आता देख।

शमशेर- धर्मवीर। ये क्या है बेड के बीच में?

धर्मवीर - (अनजान बनते हुए।। ) पता नही

शमशेर - ।।। झूठ मत बोल।। सच बता ये तेरी करतूत है न?

धर्मवीर - क्या बोल रहे हो?

शमशेर - मैं अच्छी तरह जानता हूँ ये क्या है? बोल सच सच?

धर्मवीर - हा।।मेरी मूठ है

शमशेर - ऐसा क्या हुआ कल जो तूने बेड पे मास्टरबैट कर लिया।। सच बोल

धर्मवीर - कुछ नहीं बस ऐसे ही मन किया

शमशेर - किसके बारे में सोच के किया? बोल?

धर्मवीर - तू जानता है यार। (धर्मवीर टॉवल से मुह पोछते हुए बोला।।)

शमशेर - क्या तूने गुंज़न ।। मतलब अपनी बहु के बारे में सोच मास्टरबैट किया?

धर्मवीर - (गर्दन झुकाते हुवे।।) हाँ

शमशेर - वो।।

शमशेर - तेरी बहु है ही ऐसी । देखा आखिर तूने भी उसके नाम की मूठ मार ही डाली। साली है हे ऐसे चीज़।। उसके बारे में सोच तो मैं रोज़ मूठ मारता हूँ

धर्मवीर - सच कह रहा है तु।। मुझसे भी कण्ट्रोल नहीं होता उसकी भरी जवानी देख कर।

शमशेर - तो कितनी बार मास्टरबैट करता है।। ? कभी उस के सामने रह कर किया?

धर्मवीर - बार एक दिन में मुट्ठ मारता हूं।। और कई बार बहु के बेड पे भी गिराया है।।

शमशेर - धर्मवीर क्या बोल रहा है।।। बहु के बेड पर???? (
धर्मवीर ने देखा शमशेर का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था। )

धर्मवीर - बहु की बड़ी बड़ी चूचियां, उसकी मांसल जाँघें और मोटी गांड मेरे दिमाग में रात दिन घूमति हैं और मैं मुठ मारने पे मजबूर हो जाता हूँ।।

शमशेर - न जाने कितने लोग तेरी बहु को देख मुट्ठ मारते होंगे।। तू किस्मत वाला है जो वो तेरे सामने है कभी मुझे भी उसके अधखुले जिस्म का मजा उठाने दे।
कभि मैं भी उसको सामने देख मुठ मारूँगा।। (ये कहते हुए शमशेर लोअर के ऊपर से अपने लंड को मसलने लगा)

शमशेर - साली तेरी बहु का नाम लेते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है।। आज तो उसकी गांड देख के मूठ मारने का मन है।।

शमशेर - बहु अपने कमरे में सो रही है क्या?

धर्मवीर - हाँ अभी सो रही होगी, मैं उठाता हू।

शमशेर - रुक मैं भी आता हूं।। मैं देखूँ बहु सोती कैसे है?

धर्मवीर और शमशेर गुंज़न कमरे में गये। कमरे में गुंज़न केवल एक वाइट कलर ब्रा पहने और ब्लैंकेट के अंदर सो रही थी।
वो दोनों उसकी नंगी पीठ और नवेल नज़र आ रही थी।

शमशेर की नज़र लगातार गुंज़न के नवेल पे थी।जीसको देख शमशेर अपने लंड मसल रहा था।

शमशेर - धर्मवीर।। दिल करता है लंड बाहर निकाल के तेरी बहु के गांड और नंगी कमर देखते हुए मास्टरबैट करूँ ।

जब वो दोनों बात कर रहे होते है तभी गुंज़न की भी उठ जाती है पर वो बिना हिले डुले धर्मवीर और शमशेर की बाते सुन रही थी

धर्मवीर - पागल हो गया है तू? यहाँ ?

शमशेर - हा।। तूने तो बहुत मज़े लिए हैं अब मुझे उसकी गांड का मजा लेने दे।

इससे पहले धर्मवीर कुछ कह पता शमशेर ने अपना विशाल लंड बाहर निकल लिया, और स्किन नीचे कर ऊपर नीचे रगडने लगा। धर्मवीर के सामने उसकी बहु को देख एक पडोसी मुठ मार रहा था।। धर्मवीर को सोच के इरेक्शन होने लगा। धर्मवीर ने देखा शमशेर का लंड बहुत बड़ा था और उसमे से काफी स्मेल आ रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे उसके लंड की स्मेल पूरे कमरे में फैल जाएगी।। थोड़ी देर में शमशेर के लंड का पानी फर्श पे निकल गया।

धर्मवीर शमशेर पकड़ जल्दी से गुंज़न के कमरे से बाहर निकल गया

उन दोनों के जाते ही गुंज़न उठ कर बैठ जाती है और अपने मन में सोचती है(ये बाबूजी तो बहौत बड़े ठरकी निकले खुद तो अपनी बेट को देख कर अपना हिलाते ही थे और अब अपने पड़ोसी को भी मज़ा दिलाने लगे)

धर्मवीर की इस हरकत से गुंज़न बहुत जयदा गरम हो जाती हैं

तभी सोनू भी अपने स्कूल से वापस आजाता हैं और
सोनू घर आकर बैठा ही था की गुंज़न सोनू का हाथ पकड़ के उठा दिया और अपने रूम मे ले जाने लगी...वो किसी पतंग की डोर की तरह गुंज़न के साथ बिना किसी विरोध के चल दिया..रूम मे आते ही
गुंज़न ने जल्दी से दरवाजा लॉक कर के सोनू से लिपट कर उsके होंठो को जल्दी जल्दी चूमने लगी उसके ऐसा करने से ही पता चल रहा था कि वो बहुत ज़्यादा चुदासी हो चुकी है

सोनू भी गुंज़न से लिपट कर उसके होंठो को चूमने चाटने लगा.....गुंज़न भी पूरी चुदासी होकर सोनू का साथ दे रही थी....होंठो को चूस्ते हुए सोनू एक हट गुंज़न के ब्लाउस पर ले गया
सोनू—भाभी चुचि दबा लूँ आपकी थोड़ा सा

गुंज़न- हाँ दबा ले ….जितना मन करे उतना दबा ले….रोज दबा दिया कर मेरे दूध…मैं कभी तुझे अपने दूध दबाने से नही रोकूंगी

किस करते हुए सोनू गुंज़न के ब्लाउस के उपर से ही दोनो चुचियो को अपने हाथो मे भर लिया और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा
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गुंज़न –आअहह...सोनू....आआअ

सोनू—क्या हुआ भाभी..... ?

गुंज़न—इतनी ज़ोर....से.....आआअ.....मत दबा....थोडा...धीरे..

सोनू—चुचि दबाने का मज़ा तो ज़ोर ज़ोर से ही है .......ये तो बनी ही दबाने के लिए हैं

फिर सोनू ने गुंज़न के ब्लाउस के बटन खोल कर ब्रा को उपर कर दिया और उनकी नंगी चुचियो क निपल को मूह मे भर के चूसने और मरोड़ने लगा...

गुंज़न—आअहह....ऐसे ही...सोनू....आअहह.....बहुत....मज़ा..आ रहा है.....और दबाओ....मेरी चुचि को.....ऐसे ही....चूसो....दोनो को चूसो ......बहुत अच्छा लग रहा है.....पहले क्यो नही ऐसा मज़ा दिया मुझे....अब रोज ऐसे ही...रगड़ना मुझे अब
जल्दी से ले ले मेरी बुर….नही तो मैं आज भी चुदासी रह जाउन्गी

सोनू —नही भाभी…….अब आप कभी चुदासी नही रहोगी……मैं हूँ ना आपकी बुर् चोदने के लिए

गुंज़न —मेरा बहुत मन करता था तुझे अपनी बुर दिखाने का……मैं रोज यही सोचती थी कि काश तू मुझे कही पटक कर चोद डाले ज़बरदस्ती……मुझ से खूब गंदी गंदी बाते करे…….. दिन भर मुझे खूब गंदा गंदा बोले …..मेरे दूध दबा दिया करे कभी भी…..कभी भी मेरी
साड़ी उठा कर बुर देख लिया करे……कभी भी मेरी मे लंड घुसेड दिया करे….मुझे रोज 8-10 बार पूरी नंगी किया करे

सोनू—पहले आपको नंगी करके बुर तो देख लूँ…फिर बताता हूँ

गुंज़न —अभी नंगी मत कर…..सब लोग हैं…..अभी साड़ी उपर कर के देख ले मेरी बुर…….सब के जाने के बाद जी भर के तू अपने हाथ से मुझे नंगी कर लेना....मुझे तेरे हाथो से नंगी होना अच्छा लगता है……अभी तो साड़ी उठा के जल्दी से बुर को चोद दे…सोनू

सोनू ने भी गुंज़न की बात को मानते हुए उन्हे बिस्तर मे लिटा कर साड़ी और पेटिकोट जाँघो से उपर कर दिया…..साड़ी उपर होते ही की गुंज़न गोरी मांसल जांघे और दोनो जाँघो के बीच छोटी छोटी काली घुंघराली झान्टो से भरपूर बुर पूरी नंगी होकर सोनू के सामने आ गयी…..बुर एकदम कचौरी की तरह खूब फूली हुई थी

सोनू ने जैसे ही गुंज़न की बुर पर हाथ फेरा तो गुंज़न चिहुक उठी मारे आनंद के...हाथ फेरते हुए सोनू ने एक उंगली धीरे से गुंज़न की बुर के छेद मे अंदर सरका दी....उसकी बुर लार टपकाने से पूरी गीली हो गयी थी

फिर सोनू गुंज़न की बुर मे मूह लगा कर जीभ से उसके अमृत रस को पीने लगा....गुंज़न खुशी और मज़े से पागल हो गयी...

गुंज़न —आआहह....सोनू मने ये कर दिया है...मैं तो आज...दीवानी हो गयी हूँ....तेरी.......खा ले...मेरी बुर को....ऐसे ही...इतना मज़ा...है मेरी बुर...मे .....और चाटो
सोनू......मेरे बुर के दाने को और चूसो.....बहुत मज़ा आ रहा
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गुंज़न—अब बस कर..आआहह….…..अब थोड़ा सा अपना भी तो दिखा ना…..मेरा तो सब देख लिया

सोनू (खुश होकर)—लो अभी देख लो भाभी और तुरंत अपना लोवर नीचे खिसका दिया

गुंज़न- सोनू मुझे तेरा लंड चूसना है और सोनू के लंड को अपने मूह मे भर ली और चूसने लगी ..
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गुंज़न—…अभी घर मे सब लोग हैं……कोई भी आ सकता है……जल्दी से कर ले चोद ले ना मेरी बुर...देख तेरे सामने पूरी नंगी है मेरी बुर......मैं तुझे अपनी बर चोदने मे खूब मज़ा दूँगी ....मैं खूब मज़ा दूँगी अपनी बुर् चोदने मे तुझे ...जल्दी से अपना लंड घुसेड के मेरी बुर मे और फाड़ दे आज मेरी बुर को....मुझे बुर चोदि बना दे....जल्दी से मेरी बुर को अपने लंड से चोद

सोनू ने गुंज़न को पकड़ कर अपने नीचे लिटाया और उसके दोनो पैर फैला कर सोनू ने लंड गुंज़न की बुर के मुहाने पर टिका कर घिसने लगा
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गुंज़न - सोनू अब घुसेड दे ना बुर के अंदर....देख नही रहा कि मेरी बुर कितनी चुदासी हो रही है

सोनू—कितनी चुदासी हो रही है.... ?

गुंज़न - मेरी बुर चुदने के लिए बहुत बहुत बहुत ज़्यादा चुदासी हो गयी है...प्ल्स इसमे अपना लंड घुसेड कर चोद दे ना मेरी बुर को

सोनू—आहह... तुझे आज से मैं रोज चोदुन्गा...नंगी कर के

गुंज़न—चोद लेना...जब तेरा मन करे

सोनू गुंज़न की गरम बाते सुन कर जोश मे आ गया और लंड को उसकी बुर के छेद मे टिका कर एक ज़ोर का शॉट लगा दिया…लेकिन वो छिटक कर उपर चला गया

गुंज़न क्या करता है...पकड़ के अच्छे से घुसेड ना मेरी बुर के छेद के अंदर…रुक मैं अपनी बुर की फांके फैलाती हूँ तू घुसेड

गुंज़न ने अपने दोनो हाथो से अपनी बुर की दोनो फांको को खूब चीर कर फैला दिया और सोनू से लंड घुसेड़ने को कहने लगी... सोनू ने छेद पर लंड
लगा के दोनो चुचियो को मजबूती से पकड़ कर कस कस कर जल्दी जल्दी तीन चार धक्के जड़ दिए उसकी बुर मे लंड गुंज़न की बुर को ककड़ी की तरह चीरता हुआ अंदर उसकी बच्चेदानी तक पेल दिय..
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सोनू—मुझे रोज दोगी ना अपनी बुर….?

गुंज़न —हां रोज दूँगी….तू जहाँ बुलाएगा…जिस समय बुलाएगा….वहाँ तुझे अपनी बुर देने रोज आउन्गी….. तुम डेली मेरे पूरे कपड़े उतार के मुझे पूरी नंगी करना….रोज नंगी करना मुझे….मैं तुम्हे रोज खूब अपनी बुर देना चाहती हूँ… बोलो ना ….. लोगे ना मेरी बुर रोज…..

सोनू —आहह... भाभी तुझे आज से मैं रोज चोदुन्गा...नंगी कर के

गुंज़न —चोद लेना...जब तेरा मन करे..अब कुछ कुछ अच्छा लग रहा है…….ऐसे ही चोदते रहो…..जी भर के चोद लो मेरी बुर को ….ऐसे ही मुझे पूरी जिंदगी भर चोदना…

सोनू बिना रुके उसकी दोनो चुचियो को ज़ोर से मीज़ते हुए बुर मे लंड पेलने लगा…..थोड़ी देर मे गुंज़न को भी मज़ा आने लगा तो वो भी अपनी गान्ड उपर उठा उठा कर सोनू का साथ देने लगी
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गुंज़न—थोड़ा और ज़ोर से….पेलो मेरी बुर मे लंड …..आअहह….मैं सारी ज़िंदगी तेरी रखैल बन कर रहने को तैयार हूँ… तू जब चाहे जहाँ चाहे पकड़ के पूरी नंगी कर देना और मेरी बुर मे अपना लंड घुसेड देना…

सोनू—चिंता मत कर मेरी भाभी...चोद चोद कर तेरी फुद्दि का फुद्दा बना दूँगा

गुंज़न—हाँ, चोद चोद के फुकला कर दे मुझे ऐसे ही ..आआआअहह.....चोदता रह मुझे.......आअहह...और ढीली कर दे मेरी बुर......खूब चोद..एयाया

सोनू—तू तो मेरी चुदैल बनेगी

गुंज़न—तेरी चुदैल तो मैं अब बन ही चुकी हू
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बहुत मज़ा आ रहा है....और ज़ोर ज़ोर से चोद....आअहह....खूब दबा मेरी चुचि....आअहह..ढीली कर दे ….अपनी भाभी की बुर को सोनू….रोज चोद चोद के....बोल चोदेगा ना रोज अपनी भाभी की बुर को...

गुंज़न—हाअ....भाभी....आपको रोज नंगी कर के चोदुन्गा

गुंज़न—मुझे डेली हर दो दो घंटे मे नंगी करना राज......मुझे खूब गंदा गंदा बोला करना....आआआअ.....मैं तो तेरी दीवानी हो गयी.....ऐसे ही.....बहुत मज़ा आ रहा है......खूब हचक हचक कर चोद मुझे र......खूब पेल मेरी बुर को........चोद डाल
राज.....चोद डाल.....हाा.....ऐसे ही....ज़ोर ज़ोर से पेलता जा......खूब मज़ा आआ...रहा है.....एयाया

सोनू- भाभी मुझे आपकी गान्ड भी चाहिए......मेरा बहुत मन है आपकी गान्ड मारने का...

गुंज़न—आआआआ.......मार लेना.....अब तो सब....कुछ तेरा है........मैं तो आज से तेरी.....रखैल बन गयी..रे...

सोनू—तो मुझे शालु दीदी की बुर दिला दो ना

गुंज़न—आआआ……तू उसको पकड़ के चोद ले……वो भी बहुत चुदासी लड़की है…..जहाँ थोड़ी देर तक उसके दूध दबाएगा तो वो अपनी बुर तुझे सौंम्प देगी…

सोनू—कहीं उन्होने थप्पड़ जड़ दिया तो…..सीधे मूह तो कभी बात नही करती वो मुझसे…..दूध क्या खाक दबाने देंगी…?

गुंज़न—आआहह……..दूध दबाने देगी……मुझे मालूम है…..वो कयि बार बता चुकी है कि वो तुझ से अपने दूध दबवाना चाहती है…लेकिन तेरे लंड से डरती है क्यों कि तू कहीं चोदने ना लग जाए…….उसका तुझ से अपने दूध दबवाने का बहुत मन करता है…..बिना डरे दबा देना……लेकिन अकेले मे…….वो कुछ नही बोलेगी और कुछ बोलती भी है तो तू दबाते रहना……वो मारेगी नही और ना ही वहाँ से
भागेगी…..बल्कि दबवाती रहेगी अपने दूध…आआआअ

सोनू —ह्बीयायये चाची…….दीदी के दूध बहुत मस्त और खड़े हैं
सोनू कस कस कर धक्के गुंज़न की बुर मे पेलने लगा...
गुंज़न झड़ने की कगार पर आ गयी

गुंज़न- मेरा होने वाला है..

सोनू—आआआ….मैं आया…ले संभाल अपनी बुर मे….आआआआआआ

गुंज़न—आआहह.....हाँ पेल दे, पेल दे, पेल दे… भर दे मेरी चूत, भर दे… भर दे इसे अपने लौड़े के पानी से… भर दे मेरी बुर.......और भर......पूरी टंकी फुल कर दे...आज ही.......पूरा सांड़ है तू.....कितना पानी छोड़ता है.....ये तो बंद ही नही हो रहा........पूरी बाल्टी भर जाएगी तेरे लंड के पानी से...आअहह...मैं भी गयी ..

और सोनू गुंज़न के उपर ढेर हो गया।
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Aise randy bhabi .bahan.beti meri bhi hoti to maza aa jata
 
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रात के 9 बज रहे है शालु अपने कमरें में बिस्तर पर लेटे हुए कुछ सोच रही है की तभी गुंज़न वहां आती है. दरवाज़ा बंद कर वो सीधा शालु के पास आ कर बैठ जाती है

गुंज़न- सोच रही है शालु? पापा के बारें में?

शालु- हाँ भाभी...पता नहीं कब मेरी तमन्ना पूरी होगी.

गुंज़न- हो जाएगी मेरी रानी.. बस तू लगे रह. (थोडा सोच कर) शालु तू सोनू पर ट्राय क्यूँ नहीं करती?

शालु- क्या फायेदा भाभी. वो तो पूरा भोंदू राम है.

गुंज़न- तू एक भोंदू राम को सयाना ना बना सकी तो तेरी ये जवानी किस काम की?

शालु : पर भाभी क्या ऐसा हो जायेगा?

गुंज़न- मैंने तो उसे कई बार तेरे चूतड़ों और चुचियों को घूरते हुए देखा है.

शालु- (आँखे बड़ी बड़ी करते हुए) क्या बोल रहे हो भाभी...?


गुंज़न- और क्या? एक दो बार तो मैंने उसे रंगे हाथों पकड़ा भी है. तेरी जवानी से परेशान हो कर बेचारा लंड मुठियाता रहता है.

शालु- सच भाभी? सोनू मेरी जवानी देख कर लंड मुठियाता है?

गुंज़न - हाँ . तेरी जवानी ने उसे परेशान कर रखा है. तू उसे थोडा सा उकसा दे तो तेरे पीछे लंड पकडे आ जायेगा. और घर में एक लंड का इंतज़ाम तो लगभग हो ही गया है. दुसरे का भी हो जाए तो सोच तेरी तो दिन और रात दोनों रंगीन हो जाएगी. दिन में पापा और रात में सोनू....और कभी-कभी दोनों एक साथ....

शालु- उफ़ ...भाभी....!! क्यूँ आग लगा रहीं हैं बदन में....

गुंज़न- आय हाय ...!! दो लंड का नाम सुनते ही देखो तो कैसे चेहरे पर लाली छा गई मेरी प्यारी ननद के... बताना शालु
आगे लेगी और किसका पीछे?

शालु- धत्त भाभी...!! मैं नहीं बताउंगी.....

गुंज़न- अरे बता ना...शर्मा क्यूँ रही है...

शालु- दोनों का एक साथ बूर में ले लुंगी...ऊऊऊऊऊ....

गुंज़न- हाय...!! ...अच्छा अब सुन. सोनू तो तुझे पर पहले से ही लट्टू है. तू बस उसे उकसा दे...समझ तेरा काम बन गया...

गुंज़न- पर भाभी कैसे?

गुंज़न-सोनू अपने कमरे में. तू वहां जा और उस से बातें कर. उसके सामने अपनी जवानी दिखा. माहौल तो गरम कर.

शालु- (हँसते हुए) भाभी आप तो जीनियस हो. आपके पास हर एक समस्या का हल होता है.

गुंज़न- मेरी तारीफ बंद कर और जल्दी से उसके कमरे में जा, और हाँ... कुछ ऐसा पहन के जा जिस से बेचारे सोनू की आँखे चौंधियाँ जाए.

शालु- समझ गई भाभी...आप फ़िक्र मत कीजिये...

चल अब म जा रही हूँ..
गुंज़न कमरे से बहार चली जाती है. शालु अपनी अलमारी में कुछ कपडे ढूढ़ती है और एक बिना बाहं की ढीली फ्रोक निकलती है. फ्रॉक पहन कर वो आईने में देखती और अपने जान ले लेने वाले हुस्न को देख कर मुस्कुरा देती है.
शालु धीरे धीरे सोनू के कमरे की तरफ बढ़ने लगती है.

वहां सोनू अपने कमरे में पहले से ही भाई-बहन की कहानी में खोया हुआ है. शॉर्ट्स में उसका लंड कई बार दीदी को याद कर के किसी नाग की तरह सर उठा चूका था. तभी उसके कानो में शालु की आवाज़ सुनी देती है. "सोनू...!! सोनू...!! सो रहा है क्या?". शालु की आवाज़ सुन के सोनू हडबडाते हुए किताब तकिये केनीचे छुपा देता है. लंड को शॉर्ट्स में किसी तरह से छुपता हुआ वो दरवाज़ा खोलता है. दरवाज़ा खुलते ही सामने शालु दिखाई देती है. बिना बाहं की ढीली फ्रॉक उसकी जांघो तक आ रही है. लम्बे बाल, उठा हुआ सीना, दूध सी गोरी और मोटी जांघे, चेहरे पर मुस्कान और एक हाथ में कंघी लिए पायल खड़ी है.

शालु- ऐसे क्या देख रहा है? सो रहा था क्या?

सोनू- न...नहीं...नहीं तो दीदी...ऐसे ही कुछ पढ़ रहा था...

शालु- (अन्दर आते हुए) भाभी भी सो गई है और पापा भी घर में नहीं है. बोर हो रही थी तो सोचा तेरे साथ थोडा टाइम बिता लूँ...तू बिजी तो नहीं है ना?

सोनू - नहीं..नहीं दीदी...बिलकुल भी नहीं....

सोनू के शॉर्ट्स में लंड फिर से फुदकने लगता है तो वो उच्छल के बिस्तर पर चला जाता है और चादर ओढ़ लेता है.
शालु उसे देख के हँसने लगती है.

शालु- (हँसते हुए) यहाँ गर्मी है और तू चादर ओढ़ रहा है.

शालु सोनू के सामने खड़ी हो कर दोनों हाथों को उठा के बाल बनाने लगती है. शालु के बगल के बाल सोनू को दिखने लगते है. वो आँखे फाड़ फाड़ के देखने लगता है. ये नज़ारा उसने कई बार देखने की कोशिश की थी लेकिन कभी देख नहीं पाया था. आज ये नज़ारा खुद उसके सामने आ कर खड़ा हो गया था.

शालु -(अपने बाल बनाते हुए) अच्छे है ना?

सोनू -(डरते हुए) क...क...क्या दीदी?

शालु- मेरे बाल, और क्या?

सोनू -..कौनसे बाल दीदी?

शालु - मेरे सर के बाल और कहाँ के?

सोनू -(हडबडाते हुए बगलों से नज़र हटाते हुए शालु के सर के बालों पर नज़र डालता है) ह...हाँ ..हाँ दीदी...बहुत अच्छे है.

शालु सोनू की हालत देख कर धीरे धीरे मुस्कुरा रही है. तभी शालु जान बुझ कर हाथ से कंघी गिरा देती है और उठाने के लिए निचे झुकती है. निचे झुकने से शालु की आधी चूचियां और बीच की गहराई दिखने लगती है. सोनू की नज़र सीधे शालु के सीने पर जाती है और वो अपनी दीदी की गोरी गोरी चूचियां और बीच की गली को आँखों से नापने लगता है.

शालु- बड़े है ना मेरे 'बॉल'..?

सोनू -हाँ दीदी...बहुत बड़े 'बॉल' है....

शालु- (झट से खड़ी हो जाती है) 'बॉल' ?? मैं बाल की बात कर रही हूँ और तू 'बॉल' बोल रहा है....तू क्या माराडोना या पेले है जो तुझे हर जगह 'बॉल' दिखाई दे रही है?

शालु की बात सुन कर सोनू का सर घूम जाता है. वो समझ नहीं पा रहा है की शालु करना क्या चाह रही है. उसकी हालत ऐसी है की सामने भुना हुआ मुर्गा रख कर कहा जा रहा हो की आज उपवास करना है. वो झट से बिस्तर पर उठ कर बैठ जाता है और अपने बाल एक बार खींच कर फिर लेट जाता है.

सोनू - दीदी आप क्या मुझे परेशान करने आई हैं?

शालु- मैं कहाँ तुझे परेशान कर रही हूँ? तू तो खुद ही परेशान हो रहा है....

तभी शालु जान बुझ के फिर से कंघी गिरा देती है और वो सीधे पास रखे सोफे के निचे चली जाती है.

शालु- देख...!! तेरी वजह से मेरी कंघी फिर से गिर गई. अब सोफे के निचे से निकालनी पड़ेगी मुझे...

यह बोल कर शालु सोफे के पास जाती है और निचे बैठ जाती है. वो घोड़ी की तरह झुक के सोफे के निचे कंघी देखने लगती है. पीछे से उसकी की फ्रॉक चढ़ के कमर पर आ जाती है और उसकी गोल गोल चुतड और बीच में कसी हुई पैन्टी दिखने लगती है. पैन्टी के आस-पास हलके बाल भी दिखने लगते है.

ये नज़ारा देख कर सोनू तो मानो पागल हो जाता है. वो शॉर्ट्स के ऊपर से ही लंड को मसलने लगता है. उसकी नज़र
शालु की सफ़ेद पैन्टी के अन्दर का नज़ारा देखने की कोशिश करने लगती है. तभी शालु उठ के खड़ी हो जाती है.

शालु-पता नहीं कहाँ चली गई कंघी. तेरे पास है कोई बड़े दांतों वाली कंघी?

सोनू -हाँ है...देता हूँ...

कहते हुए सोनू बिस्तर से हाथ बढ़ा के पास के शेल्फ से कंघी निकलने की कोशिश करता है. शालु इसे एक मौके के रूप में देखती है. वो झट से दौड़ के बिस्तर के पास पहुँच जाती है.

शालु+ तू रहने दे...मैं खुद ही ले लुंगी...

कहते हुए शालु बिस्तर पर चढ़ जाती है और शेल्फ पर झुक कर कंघी देखने लगती है. निचे लेटे सोनू की नज़र सीधे पायल की फ्रॉक के अन्दर जाती है तो उसकी आँखे जैसे बाहर ही आ जाती है. शालु की पैन्टी साफ़ दिखने लगती है, चिकना पेट और उसकी गहरी नाभि, बीना ब्रा के बड़े बड़े भरे हुए सक्त दूध. अपनी बहन के बड़े बड़े दूध देख कर सोनू का लंड शॉर्ट्स में सलामी देने लगता है.

शालु भी जान बुझ कर कंघी ढूंडने में वक़्त लगाती है ताकि सोनू उसके फ्रॉक के निचे से अन्दर का पूरा नज़ारा अच्छे से देख ले. जब शालु को लगता है की सोनू ने पूरा मजा ले लिया है तो वो कंघी ले कर बिस्तर से निचे उतर जाती है.

शालु- तेरी कंघी मैं ले कर जा रही हूँ, तू मेरी सोफे के निचे से निकाल लेना.

शालु गाना गुनगुनाते हुए दरवाज़ा लगा कर बाहर चली जाती है. बाहर जाते ही वो चुपके से दरवाज़े के की-होल से अन्दर देखने लगती है की सोनू क्या कर रहा है.
शालु के बाहर जाते ही सोनू झट से अपनी शॉर्ट्स उतार के फेक देता है. उसका 8 इंच का लंड फनफनाता हुआ बाहर आ जाता है. वो अपने फ़ोन पर शालु की एक फोटो देखते हुए लंड को मुठीयाने लगता है. लंड मुठियाते हुए शक की फोटो देख कर सोनू उसके नंगे बदन को याद कर रहा है जो अभी-अभी उसने देखा था. सोनू लंड हिलाते हुए पागलों की तरह बडबडाये जा रहा था, -"ओह मेरी दीदी....!! अपनी जवानी मेरे नाम कर दीजिये...", "देखिये ना...आपका छोटा भाई कैसे लंड हिला रहा है", "शालु दीदी...एक बार अपनी बूर में डलवा लो मेरा", "अगर आपको कुछ नहीं करना तो मत करिए...एक बार...बस एक बार अपने भाई के साथ बाथरूम में नंगी हो कर नहा लीजिये दीदी....आह्ह्ह...!!".

बाहर शालु ये सब देख और सुन रही थी. उसे यकीन नहीं हो रहा था की जो भाई उसके साथ दिन-रात बच्चों की तरह झगड़ता रहता है वो असल में उसकी जवानी का इस कदर दीवाना है. शालु धीरे से अपनी चूची मसल देती है और फिर से अन्दर देखने लगती है अन्दर सोनू पूरे जोश में है. उसका हाथ लंड पर तेज़ रफ़्तार से चले जा रहा है. अब वो लंड हिलाते, फ़ोन पर शालु की फोटो देखते हुए सामने दिवार के पास पहुँच जाता है. दिवार के सामने वो 2-3 बार लंड मुठियाते हुए अपनी कमर ऊपर उठता है और फिर अपने लंड से दिवार पर कुछ लिखने लगता है. वो लंड को पकड़ कर, उसके टोपे को दिवार पर रगड़ते हुए, लंड से निकलती लार से लिखने लगता है. कुछ ही पल में वो लिख कर थोडा पीछे होता है और जोर से - " दीदी..आह्ह्ह....ओह दीदी...आह्ह्ह्ह...." चिल्लाते हुए लंड से गाढ़े पानी की पिचकारियाँ दिवार पर उड़ाने लगता है. 6-7 पिचका शालु के नाम से दिवार पर उड़ाने के बाद वो थक कर बिस्तर पर गिर जाता है.

ये सब देख कर शालु की धड़कन बढ़ जाती है. वो किसी तरह से अपने ऊपर काबू पाती है और दौड़ती हुई अपने कमरे मैं आती है. आज जो उसने सोनू के कमरे में देखा था वो उसने सपने भी नहीं सोचा था. अपने ही छोटे भाई को उसकी बूर के लिए ऐसे तड़पते देख शालु का मन भी मचलने लगा था. अपने कमरे का दरवाज़ा बंद कर, शालु बिस्तर पर लेट जाती है. खुली हुई आँखों से वो सोनू को अपना लंड हाथ में लिए उसकी जवानी के लिए तड़पता देख रही है. गुंज़न ने उसे सीख दी थी की बूर को बस लंड चाहिए, फिर चाहे वो किसी का भी हो. लेकिन शालु अब उस से कहीं ज्यादा आगे बढ़ चुकी थी. लंड और बूर के बेनाम रिश्ते में अब नाम जुड़ने लगे थे. उसकी बूर को लंड तो चाहिए था पर वो लंड अब उसके पापा और भाई का था. समाज के लिए जो पाप था, शालु के लिए वो अब परमसुख पाने का आधार बन चूका था. अपने ही ख्यालों में खोयी हुई, पापा और सोनू की याद में, उसकी आँखे बंद होती है और वो नींद की आगोश में चली जाती है.
 

Sumit1990

सपनों का देवता
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Bhai ya to kahani ko incest Karo ya kahani ka character change Karo.....
 
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prasha_tam

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Badhiya aur Shandar
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Superb Update
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👌




Please continue
👍




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