• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Romance DharmPatni

kamdev99008

FoX - Federation of Xossipians
10,225
38,843
259

kamdev99008

FoX - Federation of Xossipians
10,225
38,843
259
मेरा दिल टूट गया था। मै नही जानता था प्रिया मेरे साथ ऐसा बर्ताव क्यू कर रही थी पर मुझे उसका बर्ताव बहुत हर्ट कर रहा था। मै थोड़ी देर छत पर टहलता रहा और अपने को शांत करने लगा। तभी मेरे कंधे पर किसी ने हाथ रखा। मै हाथ के स्पर्श से हि समझ गया की ये माँ है। मै माँ की ओर मुड़ा तो माँ ने पूछा: क्या हुआ तु यहां अकेला छत पर क्या कर रहा है?

मै: माँ मै तो वैसे हि टहलने आया था।

माँ अचंभे से मुझे देखते हुए: दिन मे धूप मे टहलने आया था वो भी प्रिया को शॉप से लेकर आते हि। बुद्धू समझा है मुझे? चल अब सच सच बता क्या बात है।

मै: माँ ऐसी कोई बात नही है आप ऐसे हि पता नही क्या क्या सोच रही हो।

माँ: ठीक है तुझे नही बताना ना। कोई बात नही मै अभी जाके प्रिया से हि पूछ लेती हु ऐसा क्या हुआ है।

प्रिया का नाम सुनते हि मै बोला: मै बताता हु माँ सब बताता हु।

माँ: अब आया ना लाइन पर बता अब क्या हुआ?

मै: माँ प्रिया किसी और से प्यार करती है तो इसीलिए मै थोड़ा अपसेट हो गया था माँ और कुछ नही है बस

माँ: ये तुझे खुद प्रिया ने बताया है?

मै: नही माँ पर उसकी बातों से मुझे ऐसा लगा। इसीलिए मेने उसे अब दिल से निकाल दिया है। आप भी इस बात को यही भूल जाओ। मुझे नींद आ रही है माँ मै सोने जा रहा हू।

ये कहकर मै नीचे आ गया। पर माँ तो माँ होती है वो तो बच्चा जब कुछ नही बोलता तब भी उसकी बात समझ जाती थी तो वो समझ गयी की मेने उन्हे सच नही बताया है। बात कुछ और है। पर उन्होंने मुझे रोका नही। मै नीचे आया और जिस रूम मे मासी माँ ने मेरा सामान रखवाया था उसमे अंदर घुस गया। अंदर घुसते हि सामने प्रिया अपना लाया हुआ लहंगा चोली पहन रही थी। उसने लहंगा चोली पहन लिए थे बस चोली की डोरी बाँध रही थी। जैसे हि उसे अहसास हुआ कोई कमरे मे आया है। वो पलटी और देखा तो मै था। उसने जब मेरी नज़र अपने पर देखी तो उसका गुस्सा सातवे आसमान पर पहुंच गया। वो सीधी मेरे पास आयी और जोरदार तमाचा मेरे गाल पर जड़ दिया। मुझे खुश समझ आता उससे पहले उसका तमाचा मेरे गाल पर पड़ चुका था। मेरी आँखों मे आंसु आ गये। मेने भरी हुयी आँखों से प्रिया को देखा और कमरे से बाहर निकल गया। मै बिल्कुल टूट चुका था। मुझे प्रिया से नफरत होने लगी। मै एक खाली कमरा देखकर उसमे घुसा और सो गया। शाम को मासी माँ ने मुझे प्यार से जगाया। मै उठा तो मासी माँ ने कहा: उठ जा बेटा खाना खा ले। अभी तक सो रहा है। तेरी तबियत तो ठीक है ना।

मै: मासी माँ मै बिल्कुल ठीक हु। बस वो सफर की थकान के कारण नींद आ गयी थी। मै मुह हाथ धोकर आता हु आप चलो। मासी माँ मेरे गाल पर एक पप्पी देकर चली गयी। मै उठा मुह धोया और बाहर आ गया। बाहर सब टेबल पर खाना खाने बैठ चुके थे। मेरे लिए एक कुर्सी खाली थी पर वो प्रिया के बगल मे थी और अब मुझे प्रिया से नफरत होने लगी थी तो मेने कुर्सी उठायी और उसे लेकर माँ और मासी माँ के बिच आकर बैठ गया। अब हमने खाना खाया। माँ मेरे चेहरे के भाव लगातार पढ़ रही थी। उन्हे मेरे बर्ताव से यकीन हो गया की मेरे और प्रिया के बीच कुछ तो हुआ है वो भी बड़ा। खाना खाकर सब अलग अलग ग्रुप मे बातें करने लगे। मासी माँ की 2 बेटियां है निया और लीना। दोनो मुझसे छोटी है पर मुझे बहुत प्यार करती है और मै भी उन्हे। मै हॉल मे अकेला बैठा मोबाइल देख रहा था तभी लीना मेरे पास आयी और बोली: प्रतीक भैय्या आप यहां अकेले क्या कर रहे हो। आओ हमारे साथ बैठो।

ये कहकर वो मुझे रूम मे ले आयी जहा पर पहले से नित्या दी, आरती भाभी, काव्या दी, निया, लीना, प्रिया, प्रिया का भाई समीर और एक और शादीशुदा लड़की थी जो नित्या दी की उम्र की हि थी। मैं तो उसे एक बार देखते हि उसमे खो गया। एक नज़र उस पर पड़ते हि लंड ने जबर्दस्त अंगड़ाई ली। लग रहा था मानो स्वर्ग की कोई अप्सरा जमीन पर उतर आयी हो। दूध जैसा गोरा रंग काले घने बाल लम्बी सुराहीदार गर्दन मोटे मोटे भारी बोबे गदराया पेट भारी भरकम गांड। अभी उसने लाल साड़ी पहन रखी थी। ब्लाउज मे उसके मोटे बोबे कहर ढहा रहे थे। मेरे लंड ने चड्डी मे हि पानी छोड़ दिया। मै बस उसे हि देखे जा रहा था। मै होश मे आया जब काव्या मुझसे बोली: प्रतीक कहाँ था पूरे दिन भर। अब मिल रहा है।
मै: यही था काव्या बस वो सफर की थकान के कारण नींद आ गयी थी तो सो गया था।
नित्या दी: प्रतीक कितने दिनों बाद देखा है तुझे। कितना बड़ा हो गया है। कॉलेज मे आ गया है ना?
मै: हाँ दी 2nd ईयर मे आ गया हु।
नित्या दी: तो कॉलेज मे किसी लड़की से दोस्ती की या अभी भी वैसे हि शर्माता है लड़कियों से।
मै बात सबसे कर रहा था पर मेरा पूरा ध्यान उसी अप्सरा पर था। नज़र बार बार उसी पर जा कर टिक रही थी। नित्या दी की बात सुनकर अप्सरा के चेहरे पर भी हल्की सी मुस्कान आ गयी। मुस्कुराते हुए तो वो और भी ज्यादा कातिल हसीना लग रही थी। लंड फिर से तन कर अंगड़ाई लेने लगा।
rani1.jpg

मै नित्या दी को कुछ जवाब दे पाता उससे पहले हि मासी माँ, माँ और प्रिया की माँ कमरे मे आ गयी। आते हि माँ बोली: कॉलेज मे लड़की से दोस्ती तो छोड़ इसने आजतक किसी लड़की से पढ़ाई सम्बन्धी बात भी नही की होगी। ये मेरा बेटा भी है और मेरी बेटी भी।
ये कहकर माँ हसने लगी। माँ के साथ सब हसने लगे। पर मेरा पूरा ध्यान उस अप्सरा पर था। वो भी हस रही थी। मासी माँ मेरे पास आयी और मेरे सिर पर हाथ फेरती हुयी बोली: खबरदार जो किसी ने मेरे प्यारे बेटे का मजाक उड़ाया तो। देखना इसके लिए मै दुनिया की सबसे सुंदर और प्यारी पत्नी लाऊंगी।
मासी माँ की इस बात पर सब एकसाथ बोल पड़े: हाँ अब इसके लिए तो आपको हि लानी पड़ेगी वरना ये तो शर्मा शर्मी मे हि रह जायेगा।
ये कहकर सब हसने लगे। मै भी सब की बात पर हलका सा मुस्कुरा दिया। इस दौरान वो अप्सरा भी मुझे देख रही थी। इस दौरान एक दो बार हमारी नज़रे भी मिली पर नज़र मिलते हि मै नज़र चुरा लेता और दूसरी तरफ देखने लगता। फिर थोड़ी देर और मेरी खिचाई चली। बाद मे दूसरी बाते भी हुयी। गपशप करके सब देर रात को सो गये। इस दौरान मेरी समीर से काफी अच्छी बनने लगी।
मुझे सुबह जल्दी उठने की आदत है तो मै सुबह जल्दी उठा। सब लोग लेट सोने के कारण अभी तक सोये हुए थे। आदमी लोग जाग चुके थे और चाय मांग रहे थे पर अभी तक सब लेडीज सो रही थी। मै उठा और जाकर चाय बनाने लगा। मेने चाय सभी आदमियों को दी। मै अपने लिए कॉफ़ी बनाने लगा तभी रसोई मे किसी के आने की आहट हुई। मेने पलटकर देखा तो वही अप्सरा थी। सुबह उठते हि वो पानी पीने रसोई मे आयी थी। उससे नज़र मिलते हि मै वापिस पलटकर कॉफ़ी बनाने लगा। मेरे दिल की धड़कन रॉकेट की स्पीड से दौड़ने लगी। लंड पज़ामे मे अकड़कर खड़ा हो गया। उसने गिलास मे पानी लिया और पीते हुए मेरे बगल मे आकर खड़ी हो गयी और बोली: hi मै रानी हु समीर की बड़ी बहन। ये कहकर उसने हाथ मिलाने के लिए हाथ आगे बढ़ाया। मै शर्म के मारे उसकी तरफ देख भी नही पा रहा था। मुझे शर्माता देख वो बोली: प्रतीक इतना तो आजकल लड़कियां भी नही शर्माती।
मेने अब रानी के चेहरे की और देखा तो मै बस देखता हि रह गया। मै फिर से उसकी नशीली गहरी आँखों मे खो गया। उसके लरजते मुलायम रसीले होठों मे अटक गया। मैक्सी मे से झाँकते उसके रसीले मोटे बूब्स मे फस कर रह गया।
rani2.jpg

मुझे अपनी और इस तरह घूरता देखकर रानी मुस्कुराई और बोली मेरा हाथ दर्द करने लगा है।
ये सुनते हि मेरा ध्यान टूटा और मुझे ध्यान आया की रानी ने हाथ मिलाने के लिए हाथ बढ़ा रखा है। मेने झट से अपना हाथ रानी के हाथ से मिलाया। क्या स्पर्श था। इतनी मुलायम की मेरे शरीर मे एक बिजली सी दौड़ गयी। लंड पूरी औकात पर आकर फटने लगा। फिर रानी बोली: कॉफ़ी बना रहे हो तो एक मेरे लिए भी बना दोगे क्या?
मै: हाँ क्यो नही। आप बस 2 मिनट रुको। मै अपनी बेस्ट कॉफ़ी बनाने मे लग गया।
रानी वही खड़ी मुझे कॉफ़ी बनाते देखती रही। मेने कॉफ़ी बनाई और 2 कप मे डालकर एक कप रानी को ऑफर किया। रानी ने थैंक्स बोलते हुए कप लिया। वो बाहर जाने लगी तो मुझे लगा जैसे मेरे अंदर से जान निकल कर जा रही है। मै रानी के साथ और समय बिताना चाहता था क्योकि एक बार सब जाग गये तो फिर मुझे ऐसा मोका नही मिलेगा तो मेने रानी से कहा: आपकी मर्जी है पर मै आपको बताना चाहता हु की सुबह सुबह छत पर टहलते हुए कॉफ़ी पीने पर ज्यादा अच्छी लगती है। रानी ये सुनकर मेरी ओर मुड़ी और हसते हुए सीढियों की ओर बढ़ गयी। मै भी जल्दी से उसके पीछे पीछे चल पड़ा। हम छत पर पहुचे और दीवार के पास खड़े होकर कॉफ़ी पीने लगे। अभी सूरज निकल रहा था। घर से दूर का पहाड़ दिख रहा था जिसकी ओट से सूरज निकलते हुए बहुत मनोरम दृश्य बन रहा था। रानी कॉफ़ी पीते हुए बस उसे हि देख रही थी और मै धीरे धीरे बढ़ते सूरज के प्रकाश मे दमकते रानी के बदन को निहार रहा था। मुझे यकीन है भगवान ने 2-3 साल का समय लिया होगा रानी को बनाने मे। क्या बला की खूबसूरती है इस नागीने मे। एक एक अंग पूरी एहतियात के साथ तराशा गया है। ना कही कुछ ज्यादा ना कुछ कम। पूरी नापतोल के साथ गढ़ा गया है इसके तन को। मै रानी का सौंदर्य देखने मे खो गया। मेरा ध्यान टूटा जब पीछे से प्रिया की आवाज़ आयी: दी यहां क्या कर रही हो, सब आपको निचे ढूंढ रहे है। ये कहते हुए वो मुझे घूर कर देखने लगी जैसे मेने उसकी बहन के साथ कोई गलत काम कर दिया हो। रानी ने प्रिया की ओर देखा और बोली: देख प्रिया कितना सुंदर दृश्य है। मन हि नही कर रहा यहां से नज़र हटाने का और प्रतीक ने क्या मस्त कॉफ़ी बनायीं। रानी मेरी और देखती हुयी बोली थैंक्स प्रतीक कॉफ़ी के लिए भी और इस नज़ारे के लिए भी। रानी के मुह से मेरी तारीफ सुनकर प्रिया का चेहरा देखने लायक था। वो रानी से बोली: चलो ना दी अब जल्दी निचे चलो सब बुला रहे है। और ये कहकर वो खींचते हुए रानी को निचे ले जाने लगी। रानी बोली चल रही हु प्रिया आराम से। मै भी मन मे गुस्से से प्रिया को कहने लगा आराम से उसे ऐसे खींच मत देख कितनी कोमल है वो। कही चोट ना आ जाए। तुम्हारी तरह कठोर नही है वो। प्रिया रानी को लेकर निचे चली गयी। मै आँख बंद करके रानी के बदन को फिर से निहारने लगा। तभी प्रिया वापिस आयी और मेरे सामने आकर मुझे अंगुली दिखाती हुयी बोली: दूर रहना मेरी दी से। अगर उस पर बुरी नज़र डाली तो तुम्हारी जिंदगी नरक बना दूंगी। प्रिया की आँखों मे गुस्सा साफ दिख रहा था। ये कहकर वो वापिस निचे चली गयी। मै बस सोचता रह गया इसे मुझसे क्या प्रॉब्लम है।
तो प्रिया है रामली भाभी जो जिंदगी नर्क बनाने आई है हमारे हीरो की
रानी तो माल है बहन चोद बनाके मानेगी

देखते हैं अगले अध्याय में क्या होता है
 

kamdev99008

FoX - Federation of Xossipians
10,225
38,843
259
रानी प्रतीक की बहन नही है
अब रिश्ते में ही सही, है तो दीदी ही वो भी शादीशुदा
 
Top