बहुत बहुत धन्यवाद आपका महोदय,
गांव में यही परेशानी होती है कि वहां ढंग का कोई कोचिंग सेंटर नहीं मिलता जहां पर बच्चों की अच्छे से पढ़ाई की जा सके। यही सब सोचकर नयन ने कोचिंग सेंटर खोलने का विचार किया जिसमें उन सबकी पत्नियों और माता पिता ने भी साथ दिया।
ये तो सही बात है कि लोग बहुओं और बेटियों में अंतर करते हैं अपने देश में इसलिए जो काम बेटी करती हैं वही काम अगर बहु करे तो पसंद नहीं आता। अगर घरवालों को कोई आपत्ति नहीं है तो गांव समाज को जरूर इस बात से आपत्ति जरूर होती है।।
बिल्कुल सही है। अगर कोई खुश है तो सामने वाला सकता है कि ये खुश कैसे हो सकता है। इसी बात को सोचकर कुछ लोगों को नींद भी नहीं आती।
वैसे एक बात तो है। नयन के संस्कार ऐसे थे कि वो लड़कियों की इज़्ज़त करता था इसलिए उस समय नयन ने लड़की को टोक दिया और सही गलत के बारे में समझाया। नयन की जगह कोई और होता तो लड़की को सही गलत के पाठ के पाठ को छोड़कर कोई और पाठ पढ़ाने लग जाता। लड़की हर भी नयन की बातों को समझा और उसे गांठ बांधकर मेहनत की और सफल भी हो गई।
बहुत बहुत धन्यवाद आपका महोदय की आपने शुरू से लेकर अंत कर अपनी इतनी उपयोगी समीक्षा से इस कहानी को सुशोभित किया। इस तरह की प्रेम कहानी मैं फिर से शुरू करूँगी जो अभी जो कहानी चल रही है उसके बाद लिखूँगी।। तब तक के लिए अभी वाली कहानी का आनंद उठा सकते हैं।।




