चंदा भाभी तो तैयार बैठी है गुड्डी ने चंदा भाभी के हवाले कर दिया है आनंद बाबू को अब तो आनंद के साथ बहुत कुछ होने वाला है गुड्डी की मम्मी ने पहले ही आनंद की खूब रगड़ाई की हैगुड्डी और मम्मी
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" एक बात तो मानना पडेगा तोहरी महतारी दिल की अच्छी हैं, बहुत अच्छी। एक बार हमसे नहीं बोलीं की ये क्या मान दी, बल्कि कहती थीं की जरा सा चीज के लिए , काहें किसी पण्डे का मन दुखी करें, खुश रहेंगे तो आशीर्वाद देंगे और सावन का आशीर्वाद उहो बनारस में बनारस के पण्डे का आसीर्बाद,... और सच में सब पण्डे खुस हो के गए, केतना तो इसी घर में न बिस्वास हो तो गुड्डी से पूछ लेना,... और पण्डे भी एक से एक जबरदस्त, तगड़े पहलवान, दूनो चूँची पकड़ के ऐसे धक्का लगाते थे, दूसर कौन होत तो चिथड़ा चिथड़ा, लेकिन तोहरे भाभी क सास, चूतड़ उठाय उठाय के वो धक्का मारें,... एक भी पंडा बिना खुश हुए नहीं गया और साथ में वो १०१ रूपया लेकर बाद में पैर भी छूती थीं। सब क सब अइसन आसीर्बाद दिए,... " मम्मी बोल रही थीं और वहां लग रहा था की श्वेता और छुटकी भी सांस रोक के सुन रही थीं क्योंकि उन दोनों की आवाज भी एकदम बंद थी,...
लेकिन गुड्डी ने बीच में बात काट दी, बोली मम्मी का आसीर्बाद दिए थे पंडा सब ,
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" तीन आसीर्बाद, पहला उनका जोबन हरदम टनाटन रहेगा, बड़ा भी कड़ा भी, दूसरा उनकी ताल तलैया में न पानी क कमी होगी न डुबकी मारने वालों की, और तीसरी , ... और यह कह के चुप हो गयीं जैसे इन्तजार कर रही हों की हम लोग कुछ बोले, गुड्डी भी चुप तो मैं ही बोला
" मम्मी क्या था तीसरा आसीर्बाद, "
वो बड़ी जोर से हंसी फिर बोलीं तोहरे फायदे वाली बात, वो बड़ी सीरियस होके बोलीं,
' कुल पंडा, एक दो नहीं सब के सब, आसीर्बाद दिए की जेकरे लिए मनौती है जिसको नौकरी मिली है, वो जरूर यही पोखरी में डुबकी मारेगा, एक बार नहीं बार बार,... "
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और अबकी श्वेता जो ध्यान से मेरी रगड़ाई सुन रही थी, उसकी आवाज आयी,
" और बनारस के पंडो का आसीर्बाद कभी खाली नहीं जाता "
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" अरे डेढ़ साल से ऊपर हो गया तो वही दो बात मैं कह रही थी की एक जब तोहरे भौजाई क मायके क नाऊ कहार वहां मजा ले लिए है तो तुम थोड़े छोड़े होंगे, " मम्मी बोल रही थीं
पर बीच में गुड्डी बोली,
" और अब तो तय भी हो गया की अगली बार सबके सामने, ... "
" एकदम, मम्मी बोलीं, और जल्दी से बात आगे बढ़ाई " दूसरी बात पंडो का आसीर्बाद तो तुम तो जरूर अपनी,... तो जहाँ से निकले हो उसको नहीं छोड़े, तो तुम्हारे मुझे मम्मी कहने पे तुम गरियाये नहीं जाओगे, या तेरी रगड़ाई नहीं होगी, भूल जाओ डबल गारी पड़ेगी और रगड़ाई तो, बस हफ्ता दस दिन है होली के तीन दिन बाद,... आओगे तो देखना "
छुटकी अब ताश के पीछे पड़ी थी, बोली अबकी पत्ते कौन फ़ेंटेगा,... मम्मी बोलीं, तुम दोनों नहीं मैं फेंटूंगी। और फोन रख दिया,... लेकिन फोन रखने के पहले उन्होंने धीरे से एक बात कही जो सिर्फ मैंने और गुड्डी ने सुनी,
" मम्मी बोलते हो तो बहुत अच्छा लगता है, खूब मीठा मीठा लगता है लगता है एकदम दिल से बोल रहे हो। "
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जबतक मैं जी मम्मी बोलता फोन कट गया, लेकिन गुड्डी ने जिस प्यार से मुझे देखा, ...मै मान गया उसकी यह बात भी बाकी बात की तरह सही थी,
हाँ जब तक हम लोग सीढ़ी चढ़ के ऊपर पहुंचे एक बार फिर गुड्डी का फोन बजा और बजाय खोलने के उसने मुझे पकड़ा दिया, तेरे लिए ही होगा, मम्मी का फोन है।
उन्ही का था, बड़ी मिश्री भरी आवाज एकदम छेड़ने वाली चिढ़ाने वाली, बोलीं
" मम्मी इस लिए तो नहीं कहते की दुद्धू , पीने का मन करता है अबकी आओगे न होली के बाद, पिला दूंगी "
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और जब तक मैं कुछ जबाब देता फोन कट गया था और हम लोग चंदा भाभी के घर पहुँच गए थे।
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वो मुझे चंदा भाभी के घर सीधे ले गई। वो मास्टर बेडरूम में थी। एक आलमोस्ट ट्रांसपरेंट सी साड़ी पहने वो भी एकदम बदन से चिपकी, खूब लो-कट ब्लाउज़।
उन्हें देखते ही गुड्डी चहक के बोली- “देखिये आपके देवर को बचाकर लायी हूँ इनका कौमार्य एकदम सुरक्षित है। हाँ आगे आप के हवाले वतन साथियों। मैं अभी जस्ट कपड़े बदल के आती हूँ…” और वो मुड़ गई।
“हेहे, लेकिन,... ये तो मैंने सोचा नहीं…” मेरी चमकी। मैं बोल पड़ा।
“क्या?” वो दोनों साथ-साथ बोली।
“अरे यार मैं। मैं क्या कपड़ा पहनूंगा। और सुबह ब्रश। वो भी नहीं लाया…”
“ये कौन सी परेशानी की बात है कुछ मत पहनना…” चंदा भाभी बोली।
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“सही बात है आपकी भाभी का घर है, जो वो कहें। और वैसे भी इस घर में कोई मर्द तो है नहीं। भाभी हैं, मैं हूँ. गुंजा है। तो आपको तो लड़कियों के ही कपड़े मिल सकते हैं। और मेरे और गुंजा के तो आपको आयेंगे नहीं हाँ…”
भाभी की और आँख नचाकर वो कातिल अदा से बोली, और मुड़कर बाहर चल दी।
चंदा भाभी तो तैयार बैठी है गुड्डी ने चंदा भाभी के हवाले कर दिया है आनंद बाबू को अब तो आनंद के साथ बहुत कुछ होने वाला है गुड्डी की मम्मी ने पहले ही आनंद की खूब रगड़ाई की हैगुड्डी और मम्मी
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" एक बात तो मानना पडेगा तोहरी महतारी दिल की अच्छी हैं, बहुत अच्छी। एक बार हमसे नहीं बोलीं की ये क्या मान दी, बल्कि कहती थीं की जरा सा चीज के लिए , काहें किसी पण्डे का मन दुखी करें, खुश रहेंगे तो आशीर्वाद देंगे और सावन का आशीर्वाद उहो बनारस में बनारस के पण्डे का आसीर्बाद,... और सच में सब पण्डे खुस हो के गए, केतना तो इसी घर में न बिस्वास हो तो गुड्डी से पूछ लेना,... और पण्डे भी एक से एक जबरदस्त, तगड़े पहलवान, दूनो चूँची पकड़ के ऐसे धक्का लगाते थे, दूसर कौन होत तो चिथड़ा चिथड़ा, लेकिन तोहरे भाभी क सास, चूतड़ उठाय उठाय के वो धक्का मारें,... एक भी पंडा बिना खुश हुए नहीं गया और साथ में वो १०१ रूपया लेकर बाद में पैर भी छूती थीं। सब क सब अइसन आसीर्बाद दिए,... " मम्मी बोल रही थीं और वहां लग रहा था की श्वेता और छुटकी भी सांस रोक के सुन रही थीं क्योंकि उन दोनों की आवाज भी एकदम बंद थी,...
लेकिन गुड्डी ने बीच में बात काट दी, बोली मम्मी का आसीर्बाद दिए थे पंडा सब ,
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" तीन आसीर्बाद, पहला उनका जोबन हरदम टनाटन रहेगा, बड़ा भी कड़ा भी, दूसरा उनकी ताल तलैया में न पानी क कमी होगी न डुबकी मारने वालों की, और तीसरी , ... और यह कह के चुप हो गयीं जैसे इन्तजार कर रही हों की हम लोग कुछ बोले, गुड्डी भी चुप तो मैं ही बोला
" मम्मी क्या था तीसरा आसीर्बाद, "
वो बड़ी जोर से हंसी फिर बोलीं तोहरे फायदे वाली बात, वो बड़ी सीरियस होके बोलीं,
' कुल पंडा, एक दो नहीं सब के सब, आसीर्बाद दिए की जेकरे लिए मनौती है जिसको नौकरी मिली है, वो जरूर यही पोखरी में डुबकी मारेगा, एक बार नहीं बार बार,... "
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और अबकी श्वेता जो ध्यान से मेरी रगड़ाई सुन रही थी, उसकी आवाज आयी,
" और बनारस के पंडो का आसीर्बाद कभी खाली नहीं जाता "
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" अरे डेढ़ साल से ऊपर हो गया तो वही दो बात मैं कह रही थी की एक जब तोहरे भौजाई क मायके क नाऊ कहार वहां मजा ले लिए है तो तुम थोड़े छोड़े होंगे, " मम्मी बोल रही थीं
पर बीच में गुड्डी बोली,
" और अब तो तय भी हो गया की अगली बार सबके सामने, ... "
" एकदम, मम्मी बोलीं, और जल्दी से बात आगे बढ़ाई " दूसरी बात पंडो का आसीर्बाद तो तुम तो जरूर अपनी,... तो जहाँ से निकले हो उसको नहीं छोड़े, तो तुम्हारे मुझे मम्मी कहने पे तुम गरियाये नहीं जाओगे, या तेरी रगड़ाई नहीं होगी, भूल जाओ डबल गारी पड़ेगी और रगड़ाई तो, बस हफ्ता दस दिन है होली के तीन दिन बाद,... आओगे तो देखना "
छुटकी अब ताश के पीछे पड़ी थी, बोली अबकी पत्ते कौन फ़ेंटेगा,... मम्मी बोलीं, तुम दोनों नहीं मैं फेंटूंगी। और फोन रख दिया,... लेकिन फोन रखने के पहले उन्होंने धीरे से एक बात कही जो सिर्फ मैंने और गुड्डी ने सुनी,
" मम्मी बोलते हो तो बहुत अच्छा लगता है, खूब मीठा मीठा लगता है लगता है एकदम दिल से बोल रहे हो। "
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जबतक मैं जी मम्मी बोलता फोन कट गया, लेकिन गुड्डी ने जिस प्यार से मुझे देखा, ...मै मान गया उसकी यह बात भी बाकी बात की तरह सही थी,
हाँ जब तक हम लोग सीढ़ी चढ़ के ऊपर पहुंचे एक बार फिर गुड्डी का फोन बजा और बजाय खोलने के उसने मुझे पकड़ा दिया, तेरे लिए ही होगा, मम्मी का फोन है।
उन्ही का था, बड़ी मिश्री भरी आवाज एकदम छेड़ने वाली चिढ़ाने वाली, बोलीं
" मम्मी इस लिए तो नहीं कहते की दुद्धू , पीने का मन करता है अबकी आओगे न होली के बाद, पिला दूंगी "
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और जब तक मैं कुछ जबाब देता फोन कट गया था और हम लोग चंदा भाभी के घर पहुँच गए थे।
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वो मुझे चंदा भाभी के घर सीधे ले गई। वो मास्टर बेडरूम में थी। एक आलमोस्ट ट्रांसपरेंट सी साड़ी पहने वो भी एकदम बदन से चिपकी, खूब लो-कट ब्लाउज़।
उन्हें देखते ही गुड्डी चहक के बोली- “देखिये आपके देवर को बचाकर लायी हूँ इनका कौमार्य एकदम सुरक्षित है। हाँ आगे आप के हवाले वतन साथियों। मैं अभी जस्ट कपड़े बदल के आती हूँ…” और वो मुड़ गई।
“हेहे, लेकिन,... ये तो मैंने सोचा नहीं…” मेरी चमकी। मैं बोल पड़ा।
“क्या?” वो दोनों साथ-साथ बोली।
“अरे यार मैं। मैं क्या कपड़ा पहनूंगा। और सुबह ब्रश। वो भी नहीं लाया…”
“ये कौन सी परेशानी की बात है कुछ मत पहनना…” चंदा भाभी बोली।
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“सही बात है आपकी भाभी का घर है, जो वो कहें। और वैसे भी इस घर में कोई मर्द तो है नहीं। भाभी हैं, मैं हूँ. गुंजा है। तो आपको तो लड़कियों के ही कपड़े मिल सकते हैं। और मेरे और गुंजा के तो आपको आयेंगे नहीं हाँ…”
भाभी की और आँख नचाकर वो कातिल अदा से बोली, और मुड़कर बाहर चल दी।
Jabardast. Manjli aur Sweta ne to bat bhi liya. Upar vala hissa aur niche vala hissa kapde fatenge. Are abhi to muh bole jija he. Bad me pakke vale. Amezing...रगड़ाई
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उधर से कुछ आवाज आती उसके पहले गुड्डी चालू हो गयी, अपनी मम्मी, मेरा मतलब मम्मी से,
" सही तो है आखिर ६ फुट का आदमी, किसी काम तो आएगा, या खाली खाने के, मैं तो गिन रही थी पूरे पांच मालपूवे, आपने कहा था न चावल का दाना गिनने का, एक भी दाना नहीं छोड़ा, जितना हम तीनो बहने मिल के हफ्ते भर में चावल खाती है एक बार में, ... और मजे से अपनी बहन महतारी का पूरा प्रोग्राम , गदहे से , घोड़े से,... मम्मी आप चिंता न करिये, ये अपने मायके पहुँच के अपनी बहन कम माल के चक्कर में पड़ भी गए तो मैं रहूंगी न साथ। लौटने का रिजर्वेशन और आप को लेने मैं और ये आएंगे, ... और जहाँ तक लौटने का सवाल है , एक बार ये घर में घुस जाएँ , ...लौटेंगे तो तभी जब आप चाहेंगी। "
गुड्डी उसी हक से बोल रही थी जिस तरह से पत्निया पति के लिए बोलती हैं अपनी माँ से
लेकिन नेपथ्य में आवाज चालू थी,...
" गुड्डी मेरा भी रिजर्वेशन " श्वेता की आवाज थी,
" दी आपका तो ये दौड़ के के कराएंगे,... सबसे पहले,... होली आफ्टर होली में आखिर आप नहीं होंगी तो इनके कपडे कौन फाड़ेगा अंदर तक रंग कौन लगाएगा ." गुड्डी चहक के बोली।
" देख यार गुड्डी, कपडे पे रंग लगाना, एक तो कपडे की बर्बादी, दूसरे रंग की बर्बादी। फिर कपड़े उतारने में बहुत टाइम बर्बाद होता है, इसलिए सीधे फाड़ ही देने चाहिए, ... मैं तो यही मानती हूँ "
श्वेता, गुड्डी से एक साल सीनियर, बारहवीं वाली,बोली।
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दो आवाजें और आयी, पहले छुटकी की फिर मंझली जो अब तक चुप थी, ' मैं भी यही मानती हूँ , दी "
" देख यार, मेरी जिम्मेदारी इन्हे इनके मायके से पकड़ के ले आने की है, फिर तीन दिन तक,... तुम सब जानो, तेरे हवाले वतन साथियों। " गुड्डी अंगड़ाई लेकर बोली,
और श्वेता ने तुरंत टीम लीडर का काम सम्हाल लिया, और वर्क डिस्ट्रीब्यूट कर कर दिया, " छुटकी, तू सबसे छोटी है सर वाला हिस्सा तेरे हिस्से, सर गाल चेहरा गर्दन सब और मंझली तू बड़ी है तो नीचे का हिस्सा तेरे जिम्मे, घुटना और उसके नीचे का। मैं बीच वाले से काम चला लूंगी। सीने से घुटने तक। '
लेकिन तब तक मम्मी की आवाज सुनाई दी, और श्वेता शांत हो गयी।
" सुनो "
" जी मम्मी " मैंने बहुत धीरे से कहा। वो बड़ी जोर से खिलखिलाईं और छेड़ते हुए बोलीं
" अबे सुन , तू अगर ये सोच रहे हो की मम्मी बोलने से गारी से बच जाओगे या मैं रगड़ाई नहीं करुँगी तो ये अपना कान, पिछवाड़ा या अपनी बहिन महतारी क जो जो चीज खोलना हो खोल के सुन ले ,... अब गारी भी डबल पड़ेगी सीधे महतारी की समझे मादरचो और रगड़ाई भी डबल होगी। चाहे जा के अपनी बहिन की बुर में छिप जाओ या महतारी के भौंसड़े में वहां से भी खींच लाएंगे हम लोग। "
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जैसे लोग हर बात पे यस सर बोलते हैं, अगर सामने बॉस खड़ा हो तो मेरे मुंह से भी निकल गया जी मम्मी
और श्वेता जोर से हंसी, बोली मतलब जाके छुपेंगे जरूर.
और मम्मी भी हंसी यहाँ गुड्डी भी, और मम्मी फिर चालू हो गयी,...
" देखो दो बाते हैं, एक तो मैं तुमसे पहले ही बता चुकी हूँ, बिन्नो की, तुम्हारी भाभी की शादी में जितने तिलकहरू, तिलक चढाने गए थे हमरे गाव वाले, नाऊ , बारी, पंडित, कहार सब की सब तोहरी महतारी क एतना तारीफ़ तारीफ़ की खुदे बुलाय बुलाय, सहरायीं, पकड़ के मुठियाई, जीभ से अस खूंटा ले ले के,... ओकरे बाद सब के सब , कउनो तिलकहरू बचा नहीं, सब की सब उनकी कुइयां में डुबकी लगाए, ... खूब गहरी,... "
लेकिन गुड्डी भी अब मूड में आ गयी थे, मंम्मी को और चढ़ाया, और मुझे जीभ निकाल के चिढ़ाया,
" मम्मी ये इतने सीधे है इन्हे कुइयां पोखर से समझ नहीं आएगा, साफ़ साफ़ बोलिए इनकी महतारी का हाल, का किया हमरे गाँव के नाऊ पंडित कहार ने ,.. "
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और इतना इशारा काफी था फिर वो चालू हो गयीं,
" अरे काहें नहीं समझ में आएगा, ... अरे ओनकर बुरिया में भोंसडे में हचक हचक के चोदे, बहुत तारीफ़ कर रहे थे सब, की कैसे चूतड़ उठा उठा के,... तो जब ससुरारी के नाऊ कहार नहीं बचे तो तुम तो जरूर चढ़े होंगे, बोलो,
मैं क्या बोलता, मेरी ओर से गुड्डी ने ही वकालत की,... " अरे मम्मी लजा रहे हैं, का बोले लेकिन छोड़ा थोड़े ही होगा इन्होने,
" एकदम लेकिन ये बताओ, माँ चोदने में लाज नहीं और बोलने में लाज, और जो माँ चोदे, उस मादरचोद को मादरचोद कहना गाली थोड़े ही होगी, अच्छा ये बताओ कुइयां मेरा मतलब भोसड़ा ज्यादा गहरा था, गाँव क कोहरा तो कह रहा था की कोई हाथ भी घुसा दे तो पता न चले,... तो कोहाइन बोली, गदहा घोडा क लंड लेती होंगी तो यही होगा न ,... "
मम्मी अब पूरे जोश में आ गयी थीं
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मैं सोच रहा था,
बगल की सीट पर उनकी छोटी बेटी, छुटकी और श्वेता बैठी है, ऊपर वाली सीट पर मंझली और मम्मी पूरे जोश में,... अगल सवाल जो उन्होंने पूछा फिर गुड्डी को मेरी बचत में आना पड़ा
मम्मी ने कहा,
अरे हम लोगन से का शरम, बोलो, तुम ऊपर चढ़े थे की की निहुरा के,...अरे लेने में लाज नहीं आयी, और अब,... तुम पेले, वो पेलवायीं और अब मुंह में दही जमा है, खाली ये बता दो कैसे लिए थे, ... पहली बार "
मुझे जवाब नहीं देना पड़ा, गुड्डी ही बोली,
" अरे मम्मी जंगल में मोर नाचा किसने देखा,... सबके सामने हो, आखिर हमरे गाँव का नाऊ कहार सब मजा लिए हैं तो कैसे लाज, .... और फिर ये भी मना नहीं नहीं कर पाएंगे,... और आपकी बात ये टालेंगे थोड़ी। "
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" एकदम सही कह रही हो " वो बोलीं, फिर मुझसे बोली,
" सही तो कह रही है गुड्डी , तुझे कुछ नहीं करना पडेगा,... मैं हूँ न , चंदा भाभी हैं , बस इस बार नहीं, अगले बार आओगे बनारस तो उनहु को बुलाय लेंगे, हम और चंदा पकड़ के निहुरा देंगे, कोई तोहार पकड़ के सटाय देगा,... ऐसा जोर से तोहार फनफनात है , बस एक धक्का मारना , ... बाकी तो, .... और उसके बाद तो वो, ... खुदे ,
और दूसरी बात और ये तो तोहरे सामने हुयी थी तो तू नकार नहीं सकते। "
और फिर वो मेरे सेल्केशन के बाद जब मैं भाभी के साथ आया था भाभी की मनौती पूरी करने,... गुड्डी की मम्मी ने भी बहुत मनौती मानी थी मेरे नौकरी लगने की,.. और अंत में भाभी ने ही उन्हें उकसाया, " भौजी और कुछ मानी होय तो बोल दीजिये और गुड्डी की मम्मी ऐसा मौका क्यों छोड़तीं, बोली
" अरे बिन्नो तोहरे सास और इनके महतारी के लिए बहुत फायदा है, हम माने थे की भैया की नौकरी लग जायेगी बनारस क सौ पंडा इनकी महतारी के ऊपर चढ़ाइब,.... तो बस अब पूजा आज हो गयी तो बस वही एक चीज बाकी है, तो उनको भेज देना दस बारह दिन के लिए,... अभी भी बहुत जांगर है उनमे एक दिन आठ दस पंडा तो निपटा ही लेंगी, ... "
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" एकदम भौजी " मेरी भाभी भी मेरी ओर चिढ़ाती निगाहों से देखते मुस्कराते बोलीं और जोड़ा,...
" अरे अब उनकी तीरथ बरत क उमर, वैसे भी साल में छह महीना तो सम्पूर्ण तीरथ यात्रा वाली बस पे ही चढ़ी रहती हैं ,... तरह तरह की मलाई का स्वाद मिलेगा और पंडे चढ़ेंगे तो आर्शीवाद भी देंगे , "
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( यह बात मेरे सामने हुयी थी यह तो सही था )
मम्मी ने फिर मुझसे कबुलवाया ,
याद आ गयी बात तो तोहार महतारी आयीं थी बनारस, आयी दस दिन के लिए और रुकी थी पूरे सवा महीने बोलो झूठ बोल रही हूँ का"
" नहीं मम्मी एकदम याद है, सावन लगा था , मैं ही तो आया था छोड़ने,... और यह भी सही है की महीने भर से ऊपर आप के यहाँ " मैंने कबूला।
" एक बात तो मानना पडेगा तोहरी महतारी दिल की अच्छी हैं, बहुत अच्छी। एक बार हमसे नहीं बोलीं की ये क्या मान दी, बल्कि कहती थीं की जरा सा चीज के लिए , काहें किसी पण्डे का मन दुखी करें, खुश रहेंगे तो आशीर्वाद देंगे और सावन का आशीर्वाद उहो बनारस में बनारस के पण्डे का आसीर्बाद,... और सच में सब पण्डे खुस हो के गए, केतना तो इसी घर में न बिस्वास हो तो गुड्डी से पूछ लेना,...
और पण्डे भी एक से एक जबरदस्त, तगड़े पहलवान, दूनो चूँची पकड़ के ऐसे धक्का लगाते थे, दूसर कौन होत तो चिथड़ा चिथड़ा, लेकिन तोहरे भाभी क सास, चूतड़ उठाय उठाय के वो धक्का मारें,... एक भी पंडा बिना खुश हुए नहीं गया और साथ में वो १०१ रूपया लेकर बाद में पैर भी छूती थीं। सब क सब अइसन आसीर्बाद दिए,... "
मम्मी बोल रही थीं
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और वहां लग रहा था की श्वेता और छुटकी भी सांस रोक के सुन रही थीं क्योंकि उन दोनों की आवाज भी एकदम बंद थी,...
लेकिन गुड्डी ने बीच में बात काट दी, बोली मम्मी का आसीर्बाद दिए थे पंडा सब ,

बहुत बहुत धन्यवाद,बहुत ही शानदार और लाजवाब अपडेट है
भाभी होली खेलने के लिए तैयार है अपने देवर के साथ । देवर भाभी के बीच हसी मजाक बहुत ही शानदार और मजेदार था
आनंद बाबू को आनंद लेने की ट्रेनिंग चंदा भाभी के जिम्मेचंदा भाभी तो तैयार बैठी है गुड्डी ने चंदा भाभी के हवाले कर दिया है आनंद बाबू को अब तो आनंद के साथ बहुत कुछ होने वाला है गुड्डी की मम्मी ने पहले ही आनंद की खूब रगड़ाई की है
Thanks so muchबहुत ही शानदार लाज़वाब और रोमांचकारी अपडेट है
देवर भाभी और गुड्डी के बीच हंसी मजाक का जो चित्रण किया है वह बहुत ही शानदार और मजेदार है देवर की तो हालत खराब कर दी चंदा भाभी ने
Ekdam is part ka masad yahi thaJabardast. Manjli aur Sweta ne to bat bhi liya. Upar vala hissa aur niche vala hissa kapde fatenge. Are abhi to muh bole jija he. Bad me pakke vale. Amezing...
Aur mammy ke sath guddi ki shararat jabardast. Bechare anand babu ji mammy. Mammy bolne par bachoge thodi. Ragdai to puri. Pure update me anabd babu ke mahtari par to phd karva di.
Jamai raja ke lie mannt wow. Maza aa gaya. Amezing...
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एकदम सही कहा आपनेचंदा भाभी तो तैयार बैठी है गुड्डी ने चंदा भाभी के हवाले कर दिया है आनंद बाबू को अब तो आनंद के साथ बहुत कुछ होने वाला है गुड्डी की मम्मी ने पहले ही आनंद की खूब रगड़ाई की है