Incestlala
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Superb superb update दीदीआज की रात
आज रात न मैं सोने वाली थी और न इनको और इनके माल को सोने देने वाली थी।
जिन कच्चे टिकोरों के लिए ,वो जब हाईस्कूल में थी,.... तब से ये तड़प रहे थे आज उनके मुट्ठी में होंगे।
जब चाहो,जितना चाहो दबाओ मीजो रगड़ो।
और वो कच्ची अमिया आज उन्हें अच्छी तरह डेकोरेटेड मिलनी वाली थी , आखिर एक तरह भाई बहन की सुहागरात थी।
और उन नए आये उरोजों को सजाया संवारा किसने था , उसी ने जिसने पूरी कोशिश की थी की
भाई बहना की ये मुलाकात न हो पाए ,
न भाई अपनी बहना को चोद पाए ,न बहना अपनी भैय्या से चुदवा पाए।
पर मैं असली भौजाई कैसे देख सकती थी ननद बिना अपने भइआ से चुदे रह जाय।
और मेरी उन्ही जेठानी ने मेरी ननद की उन टांगो को जो अब ज्यादा तर उठी रहने वाली थीं, उबटन लगाया ,
पेडिक्योर किया और
क्या रच रच कर मेंहदी लगाई ,
असल में उनके देवर को मेंहदी का सिंगार बहुत पसंद था और उनसे ज्यादा ,
उनके मूसलचंद को ,
मेरी जेठानी ने जो सुन्दर मेंहदी अपनी किशोर कमसिन ननदी को लगायी , और उन्ही मेंहदी लगे छोटे छोटे टीनेजर हाथों से आज
उनके देवर के मूसलचंद को उनकी छोटकी ननदिया पकड़ेगी ,सहलायेगी,दबाएगी ,मसलेगी। अपने भइया के औजार के कड़ेपन का मोटापे का अहसास अपनी कोमल हथेली में करेगी।
मेरी उन जेठानी ने जो एकदम खिलाफ थीं ,मेरी सास से शिकायत करने वाली थीं ,खुद अपने हाथों से उसके हाथों में मेंहदी रच रच कर लगाई।
लेकिन रिकार्ड तोड़ दिया मेरी जेठानी ने मेरी ननद के छोटे छोटे जुबना पर ,जिसके लिए मेरी ननद जिल्ला टॉप माल के नाम से जानी जाती थी।
बूब्स के बेस से लेकर निप्स तक , क्या रच रच के मेंहदी लगाई मेरी सैंया की बहना को ,
बेल बूटे सब काढ़ दिए गुड्डी के उभरते उभारों पर ,
उसकी कच्ची अमिया तो वैसे ही आग लगाती थी , और अब मेरी जेठानी ने जो मेंहदी लगायी थी उन चूँचियों पर ,
आज की रात तो मेरी जेठानी की ननद की इन कच्ची अमियों की ,...
बस थोड़ी देर ही आँख लगी।
उन्होंने ही मुझे उठाया , पैकिंग इन्होने पूरी कर दी थी।
दो बजने वाले थे ,गुड्डी और उसकी मस्त मस्त सहेलियों के आने का टाइम ,
गुड्डी के स्कूल की पार्टी यानी फुलटाइम मस्ती
funny poem lines
स्कूल से कालेज एक लम्बी छलांग होती है ,इंटर की सारी लड़कियॉं और पार्टी दे रही ११ वीं की लड़कियां
मस्ती तो होनी ही थी , फिर कौन कहाँ जाए , कब मिले
स्कूल की यूनिफार्म ,चहारदीवारी लांघ कर कालेज में पहुंचने की खुशी ,
funny poem lines
और सहेलियों से बिछुड़ने का गम भी
कोई अपनी सालियों का इतनी बेसब्री से इन्तजार नहीं करता जितना वो अपनी 'बहनों ' का कर रहे थे।
हम दोनों धड़धडाते नीचे आगये ,किचेन से खाने की खुशबू आ रही थी ,आज पहली बार मैं जेठानी के हाथ का बना खाना खाने वाली थी।
टेबल आलरेडी सेट थी ६ के लिए ,हम तीन हमारे तीन ,गुड्डी और उसकी शैतान सहेलियां , दिया और छन्दा ,मेरी फेवरिट ननदें , पार्टनर्स इन क्राइम।
हम लोग बरामदे में खड़े ही थे की बाहर से चहकने की आवाजें आने लगीं , और धड़ाक से दरवाजा खुला , सबसे पहले दिया।
मैंने उसको आँख भर देखा भी न होगा की उसने मुझे दबोच लिया और जोर से चीखी ,